{"_id":"69406e689ab737481e03437d","slug":"lord-shows-the-path-of-devotion-to-misguided-mankind-bharti-kurukshetra-news-c-45-1-kur1007-146992-2025-12-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"पथ भ्रष्ट मानव जाति को भक्ति का मार्ग बताते हैं प्रभु : भारती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पथ भ्रष्ट मानव जाति को भक्ति का मार्ग बताते हैं प्रभु : भारती
Tue, 16 Dec 2025 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 16 Dec 2025 01:54 AM IST
विज्ञापन
पिहोवा। दिव्य ज्योति जाग्रती संस्थान गांव टिकरी धर्मशाला में तीन दिवसीय हरि कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रथम दिवस में गुरुदेव आशुतोष की शिष्या सत्या भारती ने बताया कि समय-समय पर प्रभु इस धरती पर अवतार लेते हैं और पथ भ्रष्ट मानव जाति को भक्ति का मार्ग बताते हैं। उन्होंने बताया कि प्रभु की दिव्य लीलाओं का तत्समय प्रयोजन तो था ही आज वर्षोपरांत भी हमारे लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं जिससे हमारे जीवन का मार्गदर्शक हो सके। अतएव प्रभु के जीवन से जुड़ी यह लीलाएं हमारे लिए खास महत्व इसलिए भी रखती हैं क्योंकि उनसे हमारी संस्कृति और लोक व्यवहार जुड़ा हुआ है।
सत्या भारती ने बताया कि महापुरुषों की लीलाओं को दिव्य लीला क्यों कहते हैं क्योंकि उनकी लीलाएं अलौकिक होती हैं जिसमें प्रत्येक मानव को कुछ सीखने को मिलता है व उनकी अलौकिक लीलाओं को हम अपनी लौकिक बुद्धि से कैसे समझ सकते हैं। बाह्य इंद्रियों से तो मानव संसार को ही नहीं देख सकता। जिस प्रकार से सृष्टि में अनेकों सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं और हमारी पृथ्वी से लाखों मील दूर आकाश में बहुत से ग्रह नक्षत्र पाए जाते हैं जिसे मानव अपनी प्राकृतिक आंखों से नहीं देख सकता। उन्हें देखने के लिए भी मानव को सूक्ष्मदर्शी जैसे यंत्र की आवश्यकता पड़ती है। कथा में साध्वी अमबला भारती व वनीता भारती ने भी मधुर भजनों का गायन कर भक्तों को भावविभोर कर दिया।
विज्ञापन
सत्या भारती ने बताया कि महापुरुषों की लीलाओं को दिव्य लीला क्यों कहते हैं क्योंकि उनकी लीलाएं अलौकिक होती हैं जिसमें प्रत्येक मानव को कुछ सीखने को मिलता है व उनकी अलौकिक लीलाओं को हम अपनी लौकिक बुद्धि से कैसे समझ सकते हैं। बाह्य इंद्रियों से तो मानव संसार को ही नहीं देख सकता। जिस प्रकार से सृष्टि में अनेकों सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं और हमारी पृथ्वी से लाखों मील दूर आकाश में बहुत से ग्रह नक्षत्र पाए जाते हैं जिसे मानव अपनी प्राकृतिक आंखों से नहीं देख सकता। उन्हें देखने के लिए भी मानव को सूक्ष्मदर्शी जैसे यंत्र की आवश्यकता पड़ती है। कथा में साध्वी अमबला भारती व वनीता भारती ने भी मधुर भजनों का गायन कर भक्तों को भावविभोर कर दिया।
विज्ञापन