शाहाबाद। सत्संग को जीवन का सारथी बना मानव जीवन व्यतीत करना चाहिए, ताकि प्रभु की प्राप्ति के बाद आवागमन से छुटकारा मिल सके। गीता ऐसा दिव्य ग्रंथ है जो चुनौतियों को सहज स्वीकार करना सिखाता है। ये विचार स्वामी ज्ञानानंद ने जीओ गीता एवं श्री कृष्ण कृपा परिवार के तत्वावधान में मारकंडा नेशनल कॉलेज में आयोजित दिव्य गीता सत्संग के तीसरे दिन बुधवार को व्यक्त किए।
इस अवसर पर प्रवचन करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि हमारे दुख का मूल कारण हमारी आवश्यकताएं नहीं, बल्कि हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो कभी न कभी अवश्य पूर्ण हो सकती हैं, लेकिन इच्छाएं निरंतर बढ़ती जाती हैं। पटियाला से पहुंचे बाबा भूपेंद्र सिंह ने भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। मंच का संचालन हरीश मुंजाल ने किया। इस मौके पर समाजसेवी संदीप गर्ग, एडवोकेट जगमोहन मनचंदा, डॉ. दीपक शर्मा, गौरव अरोड़ा, राज ऋषि गंभीर, एसडीएम नवीन आहूजा व काला आहुजा के अलावा रमेश सचदेवा, पूर्व पार्षद निशा भार्गव, विशाल आनंद, जुगल किशोर कालड़ा मौजूद रहे।