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Kurukshetra News: कुवि के सहायक प्रोफेसर डॉ. कृष्ण का ब्रेन हेमरेज से निधन, विवि परिसर में शोक की लहर
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कुरुक्षेत्र। डॉ. कृष्ण का फाइल फोटो।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सोशल वर्क विभाग में अनुबंधित सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत 39 वर्षीय डॉ. कृष्ण कुमार का शनिवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले एक माह से ब्रेन हेमरेज के कारण जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। उनके निधन से विश्वविद्यालय परिसर में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. कृष्ण नौ अप्रैल की रात पुरुष छात्रावास में अचानक बीपी बढ़ गया। तत्काल उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां से उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहां जांच में पता चला कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया है। इसके बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें चंडीगढ़ के पीजीआई में भर्ती किया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। हालत में सुधार न होने पर उन्हें करनाल के अरविंद अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. कृष्ण मूल रूप से जींद जिले के डुढाना गांव के निवासी थे और अभी उनकी शादी नहीं हुई थी। वे विवि के ही छात्र रहे थे और उन्होंने यहां से एमए इंग्लिश, एमए सोशल वर्क और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। 2015 से वे सोशल वर्क विभाग में अनुबंधित शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। शनिवार दोपहर बाद ही उनके पैतृक गांव अंतिम दाह किया गया। उनके निधन से न केवल सोशल वर्क विभाग, बल्कि पूरा विश्वविद्यालय शोकाकुल है। सोशल मीडिया पर भी हर कोई उनकी पोस्ट को शेयर कर रहा है।
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विवि एक योग्य शिक्षक से हुआ वंचित
सोशल वर्क विभाग की अध्यक्षा प्रो. वनीता ढींगरा ने बताया कि डॉ. कृष्ण एक होनहार शिक्षक और विनम्र व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें पहले किडनी और हाई बीपी की समस्या थी, जिसके इलाज वे नियमित रूप से करवा रहे थे। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के निर्देशन में विवि द्वारा उन्हें हरसंभव आर्थिक और भावनात्मक सहायता प्रदान की। बावजूद इसके डॉक्टरों की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं और विश्वविद्यालय एक योग्य शिक्षक से वंचित हो गया।
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डॉ. कृष्ण नौ अप्रैल की रात पुरुष छात्रावास में अचानक बीपी बढ़ गया। तत्काल उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां से उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहां जांच में पता चला कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया है। इसके बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें चंडीगढ़ के पीजीआई में भर्ती किया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। हालत में सुधार न होने पर उन्हें करनाल के अरविंद अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
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डॉ. कृष्ण मूल रूप से जींद जिले के डुढाना गांव के निवासी थे और अभी उनकी शादी नहीं हुई थी। वे विवि के ही छात्र रहे थे और उन्होंने यहां से एमए इंग्लिश, एमए सोशल वर्क और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। 2015 से वे सोशल वर्क विभाग में अनुबंधित शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। शनिवार दोपहर बाद ही उनके पैतृक गांव अंतिम दाह किया गया। उनके निधन से न केवल सोशल वर्क विभाग, बल्कि पूरा विश्वविद्यालय शोकाकुल है। सोशल मीडिया पर भी हर कोई उनकी पोस्ट को शेयर कर रहा है।
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विवि एक योग्य शिक्षक से हुआ वंचित
सोशल वर्क विभाग की अध्यक्षा प्रो. वनीता ढींगरा ने बताया कि डॉ. कृष्ण एक होनहार शिक्षक और विनम्र व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें पहले किडनी और हाई बीपी की समस्या थी, जिसके इलाज वे नियमित रूप से करवा रहे थे। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के निर्देशन में विवि द्वारा उन्हें हरसंभव आर्थिक और भावनात्मक सहायता प्रदान की। बावजूद इसके डॉक्टरों की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं और विश्वविद्यालय एक योग्य शिक्षक से वंचित हो गया।