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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र पूरे विश्व को दिखा रहा है शांति सद्भावना का मार्ग
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कुरुक्षेत्र। गीता स्थली कुरुक्षेत्र पूरे विश्व को शांति व सद्भावना का मार्ग दिखाने का काम कर रहा है। इससे पूरे विश्व में संघर्ष मिट जाएगा और शांति सद्भावना बन जाएगी। यह कहना था कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का।
वे वीरवार को देर सायं ब्रह्मसरोवर पुरुषोतमपुरा बाग में महोत्सव के गीता महाआरती कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पहले उक्त दोनों मंत्रियों के अलावा जांजीबार की सांस्कृतिक एवं खेल मंत्री टीएम माविता, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, आरएसएस के वरिष्ठ नेता सतीश, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबडा, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर आदि ने ब्दि्मसरोवर की महाआरती और पूजा-अर्चना की। इस महाआरती का गुणगान पंडित बलराम गौतम, पंडित सोमनाथ शर्मा, गोपाल कृष्ण गौतम, अनिल व रुद्र ने किया।
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कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि कलयुग से 35 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता का उपदेश दिया और महर्षि वेद व्यास ने पवित्र ग्रंथ गीता को प्रकट किया।
श्रीमद्भगवद् गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का संदेश अर्जुन को सुनाया था। भगवत गीता में एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग की बहुत सुंदर ढंग से व्याख्या की गई है।
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वे वीरवार को देर सायं ब्रह्मसरोवर पुरुषोतमपुरा बाग में महोत्सव के गीता महाआरती कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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इससे पहले उक्त दोनों मंत्रियों के अलावा जांजीबार की सांस्कृतिक एवं खेल मंत्री टीएम माविता, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, आरएसएस के वरिष्ठ नेता सतीश, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबडा, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर आदि ने ब्दि्मसरोवर की महाआरती और पूजा-अर्चना की। इस महाआरती का गुणगान पंडित बलराम गौतम, पंडित सोमनाथ शर्मा, गोपाल कृष्ण गौतम, अनिल व रुद्र ने किया।
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कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि कलयुग से 35 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता का उपदेश दिया और महर्षि वेद व्यास ने पवित्र ग्रंथ गीता को प्रकट किया।
श्रीमद्भगवद् गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का संदेश अर्जुन को सुनाया था। भगवत गीता में एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग की बहुत सुंदर ढंग से व्याख्या की गई है।