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Kurukshetra News: श्रीराम की भक्ति कर बजरंगी नाम से विख्यात हो गए कुलवंत सिंह
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कुरुक्षेत्र। थानेसर शहर की फौजी कॉलानी वासी सरदार कुलवंत सिंह भट्टी पिछले 54 वर्षों से रामलीला में हनुमान का किरदार निभाकर हिंदू-सिख एकता की मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने साल 1971 में पहली बार रामलीला मंचन के दौरान हनुमान जी का अभिनय किया था। कला प्रेमियों ने इतना सराहा कि तारा सिंह के पुत्र श्रीराम नाम जपते हुए क्षेत्र में रामभक्त के रूप में पहचान बन गए। बच्चों से लेकर युवा वर्ग और वरिष्ठजन भी उनकी कलाकारी के दीवाने हैं।
कुलवंत भट्टी बताते हैं कि वे बचपन से ही हनुमान जी की कहानियां सुनते रहे हैं। इसके बाद गुरुजी मूलचंद शर्मा का जीवन में आना हुआ। वे भी रामलीला में हनुमान जी का किरदार निभाया करते थे। श्रीराम ड्रामाटिक क्लब में कार्य करते हुए उनका सान्निध्य प्राप्त कर प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के प्रति आसक्ति और बढ़ी। धीरे-धीरे वे भी रामलीला में काम करने की इच्छा जाहिर करने लगे। वर्ष 1971 में पहला मौका था, जब गुरुजी से शिक्षा लेकर उनका यह सपना पूरा हुआ और हनुमान जी की भूमिका निभाने का अवसर मिला। आज पूरे 53 साल हो चुके हैं।
वर्तमान में परशुराम चौक के निकट श्री लक्ष्मी रामलीला ड्रामाटिक विष्णु कालॉनी की ओर से कराई जाने वाले रामलीला मंचन ग्रुप से जुड़कर प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति कर रहे हैं। यह प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का ही आशीर्वाद है कि 75 साल की आयु में भी प्रभु श्रीराम की सेवा में हनुमान जी की भूमिका का मंचन आज भी जारी है। विशेष बात ये भी है कि रामलीला मंचन के दौरान और दशहरा तक करीब 40 दिन अन्न का ग्रहण नहीं करते। रिहर्सल के दौरान अन्न का त्याग कर देते हैं। स्वयं को नकली बालों तथा अन्य केमिकल युक्त सामग्री से दूर रख शरीर पर सादा सिंदूर और देसी घी का लेप लगाते हैं।
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परिवार पर असर, पौत्र निभाता मकरध्वज की भूमिका
बजरंगी के नाम से विख्यात भट्टी ने बताया कि वे कोरोना काल में बहुत ज्यादा बीमार हो गए थे, लेकिन हनुमान की का अशीर्वाद बना रहा और वे तकलीफ के बावजूद बिल्कुल स्वस्थ हो गए। इसके अलावा परिवार पर भी हनुमान जी की बड़ी कृपा है। सभी सदस्य श्रीराम और हनुमान जी के भक्त बन चुके हैं। बताया कि उनका पौत्र हर्षदीप सिंह भट्टी भी रामलीला के दौरान हनुमान जी के पौत्र मकरध्वज का किरदार निभाता है।
माता-पिता, बुजुर्गाें का सम्मान करें, हनुमान जी की कृपा होगी : भट्टी
शिव शक्ति सेवा मंडल की तरफ से सामाजिक कार्याें में सहभागिता तथा कांवड शिविरों में छबील इत्यादि की सेवा लगाई जाती है। उन्होंने आजकल के बच्चों और युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए भट्टी ने अपील में कहा कि उन्हें श्रीराम जी के अनन्य भक्त हनुमान जी से शिक्षा लेकर उनके चरित्र से श्रद्धा और भक्ति की सीख लेनी चाहिए। अपने माता-पिता और बुजुर्गाें का सम्मान करें। हनुमान जी की कृपा बनी रहेगी।
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कुलवंत भट्टी बताते हैं कि वे बचपन से ही हनुमान जी की कहानियां सुनते रहे हैं। इसके बाद गुरुजी मूलचंद शर्मा का जीवन में आना हुआ। वे भी रामलीला में हनुमान जी का किरदार निभाया करते थे। श्रीराम ड्रामाटिक क्लब में कार्य करते हुए उनका सान्निध्य प्राप्त कर प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के प्रति आसक्ति और बढ़ी। धीरे-धीरे वे भी रामलीला में काम करने की इच्छा जाहिर करने लगे। वर्ष 1971 में पहला मौका था, जब गुरुजी से शिक्षा लेकर उनका यह सपना पूरा हुआ और हनुमान जी की भूमिका निभाने का अवसर मिला। आज पूरे 53 साल हो चुके हैं।
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वर्तमान में परशुराम चौक के निकट श्री लक्ष्मी रामलीला ड्रामाटिक विष्णु कालॉनी की ओर से कराई जाने वाले रामलीला मंचन ग्रुप से जुड़कर प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति कर रहे हैं। यह प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का ही आशीर्वाद है कि 75 साल की आयु में भी प्रभु श्रीराम की सेवा में हनुमान जी की भूमिका का मंचन आज भी जारी है। विशेष बात ये भी है कि रामलीला मंचन के दौरान और दशहरा तक करीब 40 दिन अन्न का ग्रहण नहीं करते। रिहर्सल के दौरान अन्न का त्याग कर देते हैं। स्वयं को नकली बालों तथा अन्य केमिकल युक्त सामग्री से दूर रख शरीर पर सादा सिंदूर और देसी घी का लेप लगाते हैं।
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परिवार पर असर, पौत्र निभाता मकरध्वज की भूमिका
बजरंगी के नाम से विख्यात भट्टी ने बताया कि वे कोरोना काल में बहुत ज्यादा बीमार हो गए थे, लेकिन हनुमान की का अशीर्वाद बना रहा और वे तकलीफ के बावजूद बिल्कुल स्वस्थ हो गए। इसके अलावा परिवार पर भी हनुमान जी की बड़ी कृपा है। सभी सदस्य श्रीराम और हनुमान जी के भक्त बन चुके हैं। बताया कि उनका पौत्र हर्षदीप सिंह भट्टी भी रामलीला के दौरान हनुमान जी के पौत्र मकरध्वज का किरदार निभाता है।
माता-पिता, बुजुर्गाें का सम्मान करें, हनुमान जी की कृपा होगी : भट्टी
शिव शक्ति सेवा मंडल की तरफ से सामाजिक कार्याें में सहभागिता तथा कांवड शिविरों में छबील इत्यादि की सेवा लगाई जाती है। उन्होंने आजकल के बच्चों और युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए भट्टी ने अपील में कहा कि उन्हें श्रीराम जी के अनन्य भक्त हनुमान जी से शिक्षा लेकर उनके चरित्र से श्रद्धा और भक्ति की सीख लेनी चाहिए। अपने माता-पिता और बुजुर्गाें का सम्मान करें। हनुमान जी की कृपा बनी रहेगी।