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Kurukshetra News: केयू टीचर्स एसोसिएशन उच्च शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए संघर्षरत
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति ने उच्च शिक्षा और शिक्षकों के लंबित मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन 24 सितंबर को इंदिरा गांधी विवि मीरपुर, रेवाड़ी में धरने में शामिल होगा। यह धरना हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशंस द्वारा आयोजित किया जा रहा है। केयू टीचर्स एसोसिएशन ने उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकड़ ने कहा कि उच्च शिक्षा राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार है। उन्होंने नियमित शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता और रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया। डॉ. खटकड़ के अनुसार, उचित सेवा शर्तों और वैध हितों की रक्षा के बिना गुणवत्ता संभव नहीं। मांगों के समाधान में देरी से शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। केयू टीचर्स एसोसिएशन एचएफयूसीटीओ की प्रमुख मांगों का पूर्ण समर्थन करता है।
प्रमुख मांगें
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सभी स्वीकृत रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए। चार वर्ष से अधिक रिक्त रहने वाले पदों को समाप्त करने का प्रावधान वापस लिया जाए। स्वीकृत पद संस्थानों की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए सृजित होते हैं। सचिव डॉ. सुरेंद्र जगलान ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 24 सितंबर का धरना मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
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शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए
एसोसिएशन विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने, एसएफएस कर्मचारियों को बजटीय कर्मचारी बनाने तथा वेतन एवं पेंशन के लिए 100 प्रतिशत सरकारी अनुदान प्रदान किए जाने की मांगों का भी समर्थन करता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम-2018 में आवश्यक संशोधन कर कैरियर उन्नयन योजना के अंतर्गत शिक्षकों को पदोन्नति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम-2010 अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम-2018 में से किसी एक को चुनने का विकल्प प्रदान किया जाए।
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अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकड़ ने कहा कि उच्च शिक्षा राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार है। उन्होंने नियमित शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता और रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया। डॉ. खटकड़ के अनुसार, उचित सेवा शर्तों और वैध हितों की रक्षा के बिना गुणवत्ता संभव नहीं। मांगों के समाधान में देरी से शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। केयू टीचर्स एसोसिएशन एचएफयूसीटीओ की प्रमुख मांगों का पूर्ण समर्थन करता है।
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प्रमुख मांगें
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सभी स्वीकृत रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए। चार वर्ष से अधिक रिक्त रहने वाले पदों को समाप्त करने का प्रावधान वापस लिया जाए। स्वीकृत पद संस्थानों की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए सृजित होते हैं। सचिव डॉ. सुरेंद्र जगलान ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 24 सितंबर का धरना मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
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शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए
एसोसिएशन विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने, एसएफएस कर्मचारियों को बजटीय कर्मचारी बनाने तथा वेतन एवं पेंशन के लिए 100 प्रतिशत सरकारी अनुदान प्रदान किए जाने की मांगों का भी समर्थन करता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम-2018 में आवश्यक संशोधन कर कैरियर उन्नयन योजना के अंतर्गत शिक्षकों को पदोन्नति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम-2010 अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम-2018 में से किसी एक को चुनने का विकल्प प्रदान किया जाए।