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ऑर्गन प्लास्टिनेशन से जानेंगे शरीर की संरचना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 01:45 AM IST
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Know the structure of the body from organ plastination, Kurukshetra
शरीर रचना विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सचिन शर्मा व उनकी टीम। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय से संबंधित राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सचिन शर्मा व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने मानव शरीर के कुछ अंगों को प्लास्टिक में बदल कर सुरक्षित किया है, जिनसे बीएएमएस के विद्यार्थी शरीर की संरचना के बारे में समझ सकेंगे।
डॉ. सचिन शर्मा और उनकी टीम ने बकरी के फेफड़े, इंसानी कान की सूक्ष्म हड्डियां और दांत को प्लास्टीनेट किया गया है। डॉ. शर्मा ने बताया कि कॉलेजों में मानव देह की कमी के कारण आयुर्वेद में स्नातकोत्तर करने वाले विद्यार्थियों को पर्याप्त मात्रा में मानव के शव डिसेक्शन के लिए नहीं मिल रहो है। एक बार चीड़फाड़ होने के बाद शरीर के ऑर्गन डैमेज हो जाते हैं। वहीं बॉडी को केमिकल्स में रखने से दुर्गंध आती है।
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इसके अलावा कई बार हाथों में सुन्नता, आंखों में जलन, उसमें पानी आने जैसे एलर्जी के लक्षण देखने को मिलते हैं। इसलिए मानव आर्गन को प्लास्टीनेशन किया जा रहा है। प्लास्टिनेशन एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग शरीर या शरीर के अंगों को संरक्षित करने के लिए शरीर रचना विभाग में किया जाता है। जिसमें पानी और वसा को कुछ विशेष प्लास्टिक तरल पदार्थों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
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इससे कम खर्च में जो पारदर्शी प्लास्टिक के नमूने प्राप्त होते हैं, जिन्हें छुआ जा सकता है, इन आर्गन के नमूनों में न तो बदबू आएगी और न ही इनके टूटने का डर होगा। यहां तक कि नमूने के अधिकांश गुणों को भी बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि वैसे देश व विदेशों में बड़े-बड़े सेंटर पर अत्याधुनिक मशीनों से प्लास्टिनेशन किया जाता है।
सहायक प्राध्यापक डॉ. आशीष नांदल ने बताया कि प्लास्टिनेशन तकनीकी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। खासकर उन संस्थान के लिए जहां बॉडी को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। इस तकनीक में ऑर्गन को अलग से रखरखाव की आवश्यकता नहीं है। लंबे समय तक विद्यार्थियों की पढ़ाई में यह सहायक होगी। संग्रहालय में मॉडल के रूप में भी रखा जा सकता है।

तीन प्रकार से होता है प्लास्टिनेशन
डॉ. सचिन शर्मा ने बताया कि प्लास्टिनेशन की तीन टेक्निक हैं। ल्यूमन कास्ट प्लास्टिनेशन, शीत और होल बॉडी प्लास्टिनेशन। अभी श्रीकृष्णा राजकीय महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग में बकरी के फेफड़े, मानव के कान की हड्डियां और दांत को प्लास्टिनेशन किया गया है। विभाग की योजना होल बॉडी प्लास्टिनेशन की है। इसके लिए वैक्यूम चैंबर और रेजिंग लिक्विड मशीन की आवश्यकता पड़ती है।
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