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Kurukshetra News: खटारा बसों में कर रहे सफर, 11 लाख की आबादी पर महज 200 बसें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Feb 2026 01:24 AM IST
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Khatara buses traveling, only 200 buses on a population of 11 lakh
कुरुक्षेत्र। नए बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते यात्री। संवाद
कुरुक्षेत्र। सीएम सिटी में 11 लाख की आबादी पर इन दिनों 200 बसों के सहारे जिलेभर की परिवहन व्यवस्था टीकी हुई है। इनमें अधिकतर बसें जर्जर और समय-सीमा पूरी कर चुकी हैं। ऐसे में इन दिनों यात्री जोखिम भरा सफर करने को मजबूर हैं। बसों की भारी कमी और पुराने बेड़े पर बढ़ती निर्भरता ने परिवहन व्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
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लोकल रूटों पर खटारा बसें दौड़ रही हैं जिनके पहिए कभी भी थम जाते हैं। आए दिन बीच रास्ते में बस खराब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे यात्रियों को असुविधा के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी खतरे का भी सामना करना पड़ रहा है।
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हाल ही में दूसरे डिपो से मिली 50 बसों से स्थिति सुधरने की उम्मीद थी लेकिन इनमें से छह बसें डिपो में आने के बाद एक हजार किलोमीटर भी नहीं चल पाईं। इतना ही नहीं, विभाग 25 फरवरी को 30 और बसों को जर्जर घोषित करने जा रहा है। पहले ही 10 बसें जर्जर हो चुकी हैं। ऐसे में बसों की उपलब्ध संख्या और घटकर गंभीर स्तर पर पहुंच जाएगी।
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जरूरत 250 बसों की, 154 से ही चलाया जा रहा काम : डिपो में परिवहन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 250 बसों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में महज 154 बसें ही उपलब्ध हैं। यानी पहले से ही 96 बसों की कमी बनी हुई है। 30 और बसों के जर्जर होने के बाद बसों की संख्या घटकर लगभग 124 रह जाएगी।
इससे रूटों पर बसों का संचालन बुरी तरह प्रभावित होगा। बसों के चक्कर कम होंगे जिससे यात्रियों की भीड़ बढ़ेगी और उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा। भीड़ के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।
रूटों पर हर रोज थम रहे पांच से छह बसों के पहिए : रोजाना पांच से छह बसों के पहिए अलग-अलग रूटों पर थम रहे हैं। वहीं आठ से 10 बसें वर्कशॉप में मरम्मत और सर्विस के लिए खड़ी रहती हैं। इससे सक्रिय बसों की संख्या और कम हो जाती है।

कई बसें अपनी तय किलोमीटर सीमा पूरी कर चुकी हैं, फिर भी उन्हें मजबूरी में सड़कों पर उतारा जा रहा है। इससे यात्रियों के साथ-साथ चालक और परिचालकों की सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है।
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