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नकारात्मक स्थानों पर होता है कलयुग का प्रभाव : अनिल शास्त्री
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कुरुक्षेत्र। कथा में व्यासपीठ का पूजन करती महिलाए। विज्ञप्ति
कुुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति की तरफ से लायलपुर धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा दूसरे दिन भी जारी रही। कथावाचक अनिल शास्त्री ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक दिन की बात है, राजा परीक्षित शिकार के लिए जंगल गए। वहां उन्होंने देखा कि एक बैल और एक गाय आपस में कुछ बातें कर रहे हैं। भागवत पुराण में बताया गया है कि धर्म के देवता बैल रूप में और पृथ्वी देवी गाय के रूप में वहां मौजूद थी। तभी राजा परीक्षित ने देखा कि एक मुकुट पहना व्यक्ति धर्म रूपी बैल को डंडे से पीट रहा है और गाय को लात मार रहा है।
अनिल शास्त्री ने बताया कि गाय और बैल को इस तरह पीटता देख राजा परीक्षित क्रोधित हो उठे और पास आकर बोले, पापी, तुम इन दोनों को क्यों मार रहे हो। मेरे राज्य में तुम्हारा ऐसा करने का साहस कैसे हुआ। इतना कहकर राजा परीक्षित ने तलवार निकाल ली और कहा आज तेरी मौत निश्चित है। अब तू मुझसे नहीं बच सकता। राजा परीक्षित के हाथों में तलवार को देख वह व्यक्ति डर से कांपने लगा। फिर बोला महाराज मैं कलियुग हूं और यहां वास करने आया हूं। इतना कहकर वह राजा के चरणों में गिर गया। तब राजा परीक्षित ने कहा, तुम अब मेरी शरण में हो, अब मैं तुम्हे मारूंगा नहीं लेकिन इसी समय मेरे राज्य से निकल जाओ। कलियुग ने कहा कि महाराज पूरी पृथ्वी पर तो आपका ही राज्य है मैं कहां जाऊं।
तब राजा परीक्षित ने उसे चार स्थान रहने को दिए। राजा ने कहा तुम गंदगी, हिंसा, वैश्यालय और जुए के धन में निवास कर सकते हो। राजा परीक्षित की बातें सुनकर कलियुग ने एक और स्थान रहने को मांगा, तब राजा ने उसे सोने अर्थात स्वर्ण में निवास करने को कहा। उनका आश्रय था कि नकारात्मक स्थानों पर ही कलयुग का प्रभाव होता है। इससे बचने के लिए स्वयं को सकारात्मक वातावरण में ही रखना चाहिए। इस अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, चरणजीत गाबा, गुलशन गाबा, अनिल पोपली, राजीव मल्होत्रा, अशोक गौतम, वीरेंद्र गोसाई, रतन कटारिया, धर्मवीर शर्मा, प्रमोद शर्मा, सरिता शर्मा, कमलेश गाबा उपस्थित रहे।
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अनिल शास्त्री ने बताया कि गाय और बैल को इस तरह पीटता देख राजा परीक्षित क्रोधित हो उठे और पास आकर बोले, पापी, तुम इन दोनों को क्यों मार रहे हो। मेरे राज्य में तुम्हारा ऐसा करने का साहस कैसे हुआ। इतना कहकर राजा परीक्षित ने तलवार निकाल ली और कहा आज तेरी मौत निश्चित है। अब तू मुझसे नहीं बच सकता। राजा परीक्षित के हाथों में तलवार को देख वह व्यक्ति डर से कांपने लगा। फिर बोला महाराज मैं कलियुग हूं और यहां वास करने आया हूं। इतना कहकर वह राजा के चरणों में गिर गया। तब राजा परीक्षित ने कहा, तुम अब मेरी शरण में हो, अब मैं तुम्हे मारूंगा नहीं लेकिन इसी समय मेरे राज्य से निकल जाओ। कलियुग ने कहा कि महाराज पूरी पृथ्वी पर तो आपका ही राज्य है मैं कहां जाऊं।
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तब राजा परीक्षित ने उसे चार स्थान रहने को दिए। राजा ने कहा तुम गंदगी, हिंसा, वैश्यालय और जुए के धन में निवास कर सकते हो। राजा परीक्षित की बातें सुनकर कलियुग ने एक और स्थान रहने को मांगा, तब राजा ने उसे सोने अर्थात स्वर्ण में निवास करने को कहा। उनका आश्रय था कि नकारात्मक स्थानों पर ही कलयुग का प्रभाव होता है। इससे बचने के लिए स्वयं को सकारात्मक वातावरण में ही रखना चाहिए। इस अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, चरणजीत गाबा, गुलशन गाबा, अनिल पोपली, राजीव मल्होत्रा, अशोक गौतम, वीरेंद्र गोसाई, रतन कटारिया, धर्मवीर शर्मा, प्रमोद शर्मा, सरिता शर्मा, कमलेश गाबा उपस्थित रहे।
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