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Kurukshetra News: दो क्विंटल फूलों से महकेगा कालेश्वर महादेव मंदिर

Tue, 25 Feb 2025 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 25 Feb 2025 02:16 AM IST
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Kaleshwar Mahadev Temple will be fragrant with two quintals of flowers.
कुरुक्षेत्र। महाशिवरात्रि पर इस बार धर्मनगरी स्थित श्री कालेश्वर महादेव मंदिर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। मंदिर परिसर में दिल्ली के गुलाब, चांदनी, गेंदा सहित विभिन्न प्रकार के दो क्विंटल फूलों से अद्भुत सजावट की जाएगी। इसके अलावा रंग-बिरंगी लाइटों से भी मंदिर को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में मंदिर में उमड़ेंगे। इसी के तहत कावड़ियों में भी भक्ति भाव देखने को मिल रहा है।
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जानकारी के अनुसार श्री कालेश्वर महादेव मंदिर ऐसा मंदिर है जहां शिवलिंग के साथ नंदी महाराज स्थापित नहीं हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक त्रेता युग में लंकापति रावण ने यहां शिव की घोर तपस्या कर अकाल मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। द्वापर युग में दुर्योधन के बहनोई जयद्रथ ने भी इस स्थान पर तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब लंकापति रावण अपने पुष्पक विमान से आकाश मार्ग से गुजर रहा था, तो श्री कालेश्वर महादेव मंदिर के ऊपर पहुंचते ही उसका विमान डगमगाने लगा। इस पर रावण नीचे उतरा और शिवलिंग के दर्शन कर वहीं रुक गया। उसने यहां घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा।
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रावण ने वरदान मांगने से पहले प्रार्थना की कि इस घटना का कोई साक्षी न हो। इस कारण भगवान शिव ने नंदी को कैलाश पर्वत भेज दिया और तभी से इस मंदिर में शिवलिंग की पूजा बिना नंदी के ही होती है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यह ऐतिहासिक मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। पौलस्त्य ऋषि द्वारा की गई थी मंदिर की स्थापना : मंदिर के पुजारी राकेश शास्त्री ने बताया कि श्री कालेश्वर महादेव मंदिर एक सिद्ध पीठ है, जिसकी स्थापना पौलस्त्य ऋषि ने की थी। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा ने इसका जीर्णोद्धार कर इसे भव्य रूप दिया। यह स्वयंभू शिवलिंग है और यहां जलाभिषेक करने से हर मनोकामना पूरी होती है। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन तालाब में स्नान करने का भी विशेष महत्व है।
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