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गगनयान मिशन के तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजने की तकनीक विकसित कर रहा इसरो : डॉ. वी नारायण
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कुरुक्षेत्र। कार्यशाला का शुभारंभ करते संस्थान निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी। संवाद
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कुरुक्षेत्र। भारत का गगनयान मिशन न केवल अंतरिक्ष में मानव को सुरक्षित भेजने और वापस लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती की संभावनाओं को भी साकार कर सकता है। ये विचार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी नारायण ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में इसरो के सहयोग में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में ऑनलाइन माध्यम से व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि यह भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती की संभावनाओं पर भी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। गगनयान मिशन के माध्यम से भारत पहली बार स्वदेशी तकनीक से मानव को अंतरिक्ष में भेजेगा और सुरक्षित वापस लाएगा। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 की असफलता से बहुत कुछ सीखते हुए चंद्रयान-3 पर कार्य किया, जिसके फलस्वरूप चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला भारत पहला देश बन गया है।
अब चंद्रयान-4 को लेकर कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ पीएसएलवी को भी और बेहतर बनाने की ओर कार्य किया जा रहा है। कार्यशाला में इसरो के शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। वैज्ञानिकों ने उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग को और अधिक सशक्त करने की बात कही। प्रतिभागियों को इसरो के वैज्ञानिकों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला, जिससे उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी गहन जानकारी दी गई। संस्थान निदेशक प्रो. रमना रेड्डी ने कहा कि एनआईटी कुरुक्षेत्र अनुसंधान के क्षेत्र में युवाओं को कार्य करने के लिए प्रेरित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेश के क्षेत्रीय समन्वयक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला में उत्तर भारत से करीब 150 महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा इसरो
इसरो अध्यक्ष डॉ. वी नारायण ने बताया कि भारत की प्रतिभा वैश्विक स्तर पर धाक जमा रही है। इसरो विकसित भारत 2047 के मिशन में अग्रिम भूमिका निभाएगा। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा और हमारे पास खुद की प्रयोगशालाएं और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक होंगे, जहां खगोल जगत से जुड़े रिसर्च किए जा सकेंगे। इसी के साथ गगनयान व जीपीएस को लेकर कार्य करना मुख्य लक्ष्य है। भारत को विकसित भारत बनाने में विज्ञान आधार है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से इसरो मिशन पर कार्य करेगा।
इन वैज्ञानिकों ने साझा किए विचार
कार्यशाला में इसरो मुख्यालय सीबीपीओ के निदेशक वैज्ञानिक जी हरिकृष्णन, इसरो के साइंटिफिक सेक्रेटरी एम गणेश पिल्लै, इसरो मुख्यालय सीबीपीओ की उप निदेशक वैज्ञानिक निरुपमा तिवारी, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) तिरुवनंतपुरम डॉ. वी अशोक और प्रो. सतीश धवन, द्रव नोदन प्रणाली केंद्र के वैज्ञानिक टीवी श्रीजीत और इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) महेंद्रगिरि के वैज्ञानिक डॉ. डीपी सुधाकर सहित अन्य इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से अपने विचार साझा किए और प्रतिभागियों से संवाद किया।
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भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती की संभावनाओं पर भी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। गगनयान मिशन के माध्यम से भारत पहली बार स्वदेशी तकनीक से मानव को अंतरिक्ष में भेजेगा और सुरक्षित वापस लाएगा। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 की असफलता से बहुत कुछ सीखते हुए चंद्रयान-3 पर कार्य किया, जिसके फलस्वरूप चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला भारत पहला देश बन गया है।
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अब चंद्रयान-4 को लेकर कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ पीएसएलवी को भी और बेहतर बनाने की ओर कार्य किया जा रहा है। कार्यशाला में इसरो के शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। वैज्ञानिकों ने उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग को और अधिक सशक्त करने की बात कही। प्रतिभागियों को इसरो के वैज्ञानिकों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला, जिससे उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी गहन जानकारी दी गई। संस्थान निदेशक प्रो. रमना रेड्डी ने कहा कि एनआईटी कुरुक्षेत्र अनुसंधान के क्षेत्र में युवाओं को कार्य करने के लिए प्रेरित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेश के क्षेत्रीय समन्वयक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला में उत्तर भारत से करीब 150 महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा इसरो
इसरो अध्यक्ष डॉ. वी नारायण ने बताया कि भारत की प्रतिभा वैश्विक स्तर पर धाक जमा रही है। इसरो विकसित भारत 2047 के मिशन में अग्रिम भूमिका निभाएगा। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा और हमारे पास खुद की प्रयोगशालाएं और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक होंगे, जहां खगोल जगत से जुड़े रिसर्च किए जा सकेंगे। इसी के साथ गगनयान व जीपीएस को लेकर कार्य करना मुख्य लक्ष्य है। भारत को विकसित भारत बनाने में विज्ञान आधार है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से इसरो मिशन पर कार्य करेगा।
इन वैज्ञानिकों ने साझा किए विचार
कार्यशाला में इसरो मुख्यालय सीबीपीओ के निदेशक वैज्ञानिक जी हरिकृष्णन, इसरो के साइंटिफिक सेक्रेटरी एम गणेश पिल्लै, इसरो मुख्यालय सीबीपीओ की उप निदेशक वैज्ञानिक निरुपमा तिवारी, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) तिरुवनंतपुरम डॉ. वी अशोक और प्रो. सतीश धवन, द्रव नोदन प्रणाली केंद्र के वैज्ञानिक टीवी श्रीजीत और इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) महेंद्रगिरि के वैज्ञानिक डॉ. डीपी सुधाकर सहित अन्य इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से अपने विचार साझा किए और प्रतिभागियों से संवाद किया।

कुरुक्षेत्र। कार्यशाला का शुभारंभ करते संस्थान निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी। संवाद