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Kurukshetra News: अस्तित्व में आया अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण, पांच सदस्य किए मनोनीत
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कुरुक्षेत्र। भविष्य में सूरजकुंड व प्रयागराज की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाना है, जिसे धरातल पर लाए जाने की कवायद तेज हो गई है। हाल ही में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद को प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया तो वहीं अब पांच सदस्य भी प्रदेश सरकार ने मनोनीत कर दिए हैं। नए सदस्यों को लेकर गत तीन दिन पहले अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। नामित किए गए सदस्यों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर स्टडी सेंटर के सहायक निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह, विजय नरूला, डॉ. अवनीत सिंह, सौरभ चौधरी व फरीदाबाद के रहने वाले डॉ. गौरव अग्रवाल शामिल है।
पिछले 34 साल से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ही इस महोत्सव का आयोजन करता रहा है। इस बार भी प्राधिकरण पूरी तरह से कार्यरूप में नहीं आया है, जिसके चलते फिलहाल केडीबी द्वारा ही नवंबर-दिसंबर में मनाए जाने वाले गीता महोत्सव की तैयारी में जुटा है। यहां तक कि जिला प्रशासन की बैठक में पूरी कार्ययोजना भी तैयार की जा चुकी है तो वहीं अनेक कार्यों को लेकर केडीबी आचार संहिता लागू होने से पहले ही टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर चुका है। सरकार की ओर से भी फिलहाल केडीबी को ही आयोजन को लेकर निर्देश है, जिसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि प्राधिकरण पूर्ण रूप में धरातल पर आया तो एन वक्त पर आयोजन इसके द्वारा ही किया जाएगा। केडीबी की ओर से तब सभी तैयारी प्राधिकरण को सौंप दी जाएंगी।
1989 में मनाया जाने लगा था जिला स्तरीय उत्सव
महोत्सव की शुरुआत साल 1989 में जिलास्तरीय उत्सव के रूप में हुई थी जबकि इससे पहले सामाजिक संस्थाएं अपने स्तर पर यह महोत्सव मनाती रही हैं। 1968 में बने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने गीता महोत्सव को व्यापक स्वरूप 1992 में ही देना शुरू किया और शिल्प व सरस मेला लगाया जाने लगा तो सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन भी बढ़ाए गए। इसके बाद 24 वर्षों तक इसी तर्ज पर मेला चलाया जाता रहा तो वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने पहली बार इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देना शुरू किया, जिसके साथ ही न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे नया स्वरूप दिए जाने के प्रयास किए जाते रहे।
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हम अपनी तैयारी में जुटे : सिंघल
केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि बोर्ड महोत्सव को लेकर अपनी तैयारी में जुटा है। नवंबर-दिसंबर माह में आयोजन होना है, जिसके लिए कई टेंडर प्रक्रिया शुरू की हुई है। आगे जैसे भी सरकार के निर्देश होंगे उसी अनुसार कार्य किया जाएगा।
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पिछले 34 साल से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ही इस महोत्सव का आयोजन करता रहा है। इस बार भी प्राधिकरण पूरी तरह से कार्यरूप में नहीं आया है, जिसके चलते फिलहाल केडीबी द्वारा ही नवंबर-दिसंबर में मनाए जाने वाले गीता महोत्सव की तैयारी में जुटा है। यहां तक कि जिला प्रशासन की बैठक में पूरी कार्ययोजना भी तैयार की जा चुकी है तो वहीं अनेक कार्यों को लेकर केडीबी आचार संहिता लागू होने से पहले ही टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर चुका है। सरकार की ओर से भी फिलहाल केडीबी को ही आयोजन को लेकर निर्देश है, जिसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि प्राधिकरण पूर्ण रूप में धरातल पर आया तो एन वक्त पर आयोजन इसके द्वारा ही किया जाएगा। केडीबी की ओर से तब सभी तैयारी प्राधिकरण को सौंप दी जाएंगी।
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1989 में मनाया जाने लगा था जिला स्तरीय उत्सव
महोत्सव की शुरुआत साल 1989 में जिलास्तरीय उत्सव के रूप में हुई थी जबकि इससे पहले सामाजिक संस्थाएं अपने स्तर पर यह महोत्सव मनाती रही हैं। 1968 में बने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने गीता महोत्सव को व्यापक स्वरूप 1992 में ही देना शुरू किया और शिल्प व सरस मेला लगाया जाने लगा तो सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन भी बढ़ाए गए। इसके बाद 24 वर्षों तक इसी तर्ज पर मेला चलाया जाता रहा तो वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने पहली बार इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देना शुरू किया, जिसके साथ ही न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे नया स्वरूप दिए जाने के प्रयास किए जाते रहे।
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हम अपनी तैयारी में जुटे : सिंघल
केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि बोर्ड महोत्सव को लेकर अपनी तैयारी में जुटा है। नवंबर-दिसंबर माह में आयोजन होना है, जिसके लिए कई टेंडर प्रक्रिया शुरू की हुई है। आगे जैसे भी सरकार के निर्देश होंगे उसी अनुसार कार्य किया जाएगा।