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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्राकृतिक संपदा की भरमार
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केयू में अर्थशास्त्र विभाग के कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा है कि विश्वविद्यालय में स्थापित अंतरराष्ट्रीय हिंद-प्रशांत अध्ययन केंद्र देश के भावी विकास में विभिन्न देशों के साथ राजनैतिक एवं रणनीतिक संबंधों को और अच्छा बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र प्राकृतिक संपदा के संसाधनों से संपन्न क्षेत्र है। वे शुक्रवार को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंद-प्रशांत अध्ययन केंद्र के उद्घाटन समारोह के अवसर पर ‘हिंद-प्रशांत में अभिनव विकास : सुरक्षा एवं धारणीय विकास उन्मुख दृष्टिकोण’ नामक व्याख्यान में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
कुलपति ने कहा कि इस विषय में हमें समय से सोचना जरूरी है कि यह किस प्रकार हमारे एवं इस क्षेत्र से जुड़े देशों के लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कुलपति ने अंतरराष्ट्रीय हिंद-प्रशांत अध्ययन केंद्र की स्थापना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केंद्र विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विद्वानों के लिए गहन अध्ययन के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
प्रो. वीएन अत्री ने कहा कि यह केंद्र एक थिंक टैंक की तरह काम करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र विविधताओं से भरा है, जो कि विकसित एवं विकासशील दोनों ही देशों की आर्थिक प्रगति में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमें स्मार्ट एवं सुरक्षित विकास की आवश्यकता है। यह केंद्र न केवल तटीय देशों के लिए बल्कि स्थल बंद देशों के लिए भी उपयोगी होगा।
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विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक कुमार चौहान ने व्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर प्रो. एसके चहल, प्रो. प्रदीप चौहान, डॉ. राजेश, डॉ. राजेंद्र, डॉ. अश्वनी, डॉ. इशू गर्ग, डॉ. हेमलता शर्मा, डॉ. रमीन, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. बहराम रमेश, वसुधा, वैभव विशेष रूप से उपस्थित रहे। शोधार्थी सुमित, विनय, नीलम, कांता, दीपा, हिमांशी, अनिल इत्यादि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा है कि विश्वविद्यालय में स्थापित अंतरराष्ट्रीय हिंद-प्रशांत अध्ययन केंद्र देश के भावी विकास में विभिन्न देशों के साथ राजनैतिक एवं रणनीतिक संबंधों को और अच्छा बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र प्राकृतिक संपदा के संसाधनों से संपन्न क्षेत्र है। वे शुक्रवार को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंद-प्रशांत अध्ययन केंद्र के उद्घाटन समारोह के अवसर पर ‘हिंद-प्रशांत में अभिनव विकास : सुरक्षा एवं धारणीय विकास उन्मुख दृष्टिकोण’ नामक व्याख्यान में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
कुलपति ने कहा कि इस विषय में हमें समय से सोचना जरूरी है कि यह किस प्रकार हमारे एवं इस क्षेत्र से जुड़े देशों के लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कुलपति ने अंतरराष्ट्रीय हिंद-प्रशांत अध्ययन केंद्र की स्थापना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केंद्र विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विद्वानों के लिए गहन अध्ययन के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
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प्रो. वीएन अत्री ने कहा कि यह केंद्र एक थिंक टैंक की तरह काम करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र विविधताओं से भरा है, जो कि विकसित एवं विकासशील दोनों ही देशों की आर्थिक प्रगति में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमें स्मार्ट एवं सुरक्षित विकास की आवश्यकता है। यह केंद्र न केवल तटीय देशों के लिए बल्कि स्थल बंद देशों के लिए भी उपयोगी होगा।
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विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक कुमार चौहान ने व्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर प्रो. एसके चहल, प्रो. प्रदीप चौहान, डॉ. राजेश, डॉ. राजेंद्र, डॉ. अश्वनी, डॉ. इशू गर्ग, डॉ. हेमलता शर्मा, डॉ. रमीन, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. बहराम रमेश, वसुधा, वैभव विशेष रूप से उपस्थित रहे। शोधार्थी सुमित, विनय, नीलम, कांता, दीपा, हिमांशी, अनिल इत्यादि मौजूद रहे।