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Kurukshetra News: राठी, गिर, बिलाही जैसी देशी नस्ल की गायें पहुंचीं मेले में
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कुरुक्षेत्र। राज्य स्तरीय पशु मेले में बछड़े के साथ रैंप पर उतरी हरियाणा नस्ल की देशी गाय। संव
कुरुक्षेत्र। घर आंगन से निकलकर सड़कों पर आई हरियाणा नस्ल की गाय के साथ-साथ राठी, गिर, बिलाही, थारपारकर जैसी गायों की देशी नस्ल को संरक्षित करने में पशुधन प्रदर्शनी व मेले कारगर साबित हो रहे हैं। धर्मनगरी में लगे राज्य स्तरीय पशु मेले में इन नस्लों की गाय विशेष तौर पर पहुंची हैं जबकि इसमें भी हरियाणा नस्ल की गाय खास आकर्षण बनी हुई है।
विभिन्न जिलों से इस नस्ल की 150 गायें मेले में पहुंची हैं। मेले के रैंप पर यह गाय अपने बछड़े के साथ उतरी तो हर कोई इसे निहारता ही रह गया। पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने इस गाय की पूजा कर मेले का उद्घाटन किया।
यह गाय आज भी प्रदेश की शान बढ़ा रही है और वर्तमान में प्रदेश की गोशालाओं व पशुपालकों के पास इस नस्ल की करीब आठ लाख गाय हैं। हरियाणा नस्ल की गाय का दूध बाकी देशी गायों से ज्यादा पौष्टिक माना जाता है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें तीन से चार प्रतिशत ही फैट है।
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इस गाय का दूध बच्चों के लिए ज्यादा पौष्टिक होता है। मेले में जींद, रेवाड़ी, चरखी दादरी सहित प्रदेश के अन्य जिलों से कई पशुपालक हरियाणा नस्ल की गाय लेकर पहुंचे हैं। इस नस्ल की गाय मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. अनिल बनवाला का कहना है कि प्राचीन काल से प्रदेश में हरियाणा नस्ल की गाय का पालन पोषण किया जाता रहा है।
वर्तमान में इस नस्ल की गाय की कीमत 40 हजार रुपये से लेकर 1.50 रुपये तक है। ये गाय बिना छुए छह फीट की दीवार को छलांग लगाकर लांघ सकती है। प्रदेश सरकार ने इस नस्ल की अधिक दूध देने वाली गाय के लिए सरकार ने रखा पांच से 40 हजार रुपये का इनाम रखा हुआ है।
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विभिन्न जिलों से इस नस्ल की 150 गायें मेले में पहुंची हैं। मेले के रैंप पर यह गाय अपने बछड़े के साथ उतरी तो हर कोई इसे निहारता ही रह गया। पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने इस गाय की पूजा कर मेले का उद्घाटन किया।
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यह गाय आज भी प्रदेश की शान बढ़ा रही है और वर्तमान में प्रदेश की गोशालाओं व पशुपालकों के पास इस नस्ल की करीब आठ लाख गाय हैं। हरियाणा नस्ल की गाय का दूध बाकी देशी गायों से ज्यादा पौष्टिक माना जाता है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें तीन से चार प्रतिशत ही फैट है।
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इस गाय का दूध बच्चों के लिए ज्यादा पौष्टिक होता है। मेले में जींद, रेवाड़ी, चरखी दादरी सहित प्रदेश के अन्य जिलों से कई पशुपालक हरियाणा नस्ल की गाय लेकर पहुंचे हैं। इस नस्ल की गाय मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. अनिल बनवाला का कहना है कि प्राचीन काल से प्रदेश में हरियाणा नस्ल की गाय का पालन पोषण किया जाता रहा है।
वर्तमान में इस नस्ल की गाय की कीमत 40 हजार रुपये से लेकर 1.50 रुपये तक है। ये गाय बिना छुए छह फीट की दीवार को छलांग लगाकर लांघ सकती है। प्रदेश सरकार ने इस नस्ल की अधिक दूध देने वाली गाय के लिए सरकार ने रखा पांच से 40 हजार रुपये का इनाम रखा हुआ है।