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Kurukshetra News: भागवत कथा में नंद घर आनंद भयो... भजन पर झूमे श्रद्धालु
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कुरुक्षेत्र। कथा में प्रवचन देते गोविंद मोद्गिल शास्त्री।
- फोटो : samvad
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण कृपा गोशाला में होली पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस का शुभारंभ डिप्टी सीएमओ डॉ. जगविंद्र सिंह, जीओ गीता के जिला प्रधान डॉ. ऋषिपाल उनकी पत्नी डॉ. सुमन, ब्राह्मण व तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जय नारायण शर्मा, प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने किया।
यजमानों ने भागवत जी की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। समिति की ओर से गोशाला के प्रधान सुनील वत्स, मंगत राम जिंदल, हंसराज सिंगला, रमाकांत, पवन भारद्वाज, अशोक अरोड़ा और अन्य पदाधिकारियों ने यजमानों का स्वागत किया। प्रसिद्ध कथावाचक गोविंद मोद्गिल शास्त्री ने सभी यजमानों को आशीर्वाद स्वरूप स्मृति चिह्न भेंट किया। चतुर्थ दिवस की भागवत कथा में गोविंद मोद्गिल शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रद्धालु पीले वस्त्रों से सजधज कर अपने लाडले कन्हैया का स्वागत और वंदन के लिए आए हुए थे। व्यासपीठ को कन्हैया के स्वागत के लिए गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था। नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के भजन पर श्रद्धालु जमकर नाचे।
उन्होंने कहा कि गुरु से हमेशा संकोच करना चाहिए। गुरु के समक्ष मर्यादा रखनी चाहिए जिससे अत्यधिक प्रेम रखते हो, उसके सामने संकोच और मर्यादा से बोलना चाहिए। इंतजार एक दिव्य भाव होता है। इंसान को चाहोगे तो इंसान का इंतजार रहेगा। वृंदावन चाहोगे तो वृंदावन जाओगे। कृष्ण रोम-रोम में चाहत भर देते हैं।
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यजमानों ने भागवत जी की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। समिति की ओर से गोशाला के प्रधान सुनील वत्स, मंगत राम जिंदल, हंसराज सिंगला, रमाकांत, पवन भारद्वाज, अशोक अरोड़ा और अन्य पदाधिकारियों ने यजमानों का स्वागत किया। प्रसिद्ध कथावाचक गोविंद मोद्गिल शास्त्री ने सभी यजमानों को आशीर्वाद स्वरूप स्मृति चिह्न भेंट किया। चतुर्थ दिवस की भागवत कथा में गोविंद मोद्गिल शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रद्धालु पीले वस्त्रों से सजधज कर अपने लाडले कन्हैया का स्वागत और वंदन के लिए आए हुए थे। व्यासपीठ को कन्हैया के स्वागत के लिए गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था। नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के भजन पर श्रद्धालु जमकर नाचे।
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उन्होंने कहा कि गुरु से हमेशा संकोच करना चाहिए। गुरु के समक्ष मर्यादा रखनी चाहिए जिससे अत्यधिक प्रेम रखते हो, उसके सामने संकोच और मर्यादा से बोलना चाहिए। इंतजार एक दिव्य भाव होता है। इंसान को चाहोगे तो इंसान का इंतजार रहेगा। वृंदावन चाहोगे तो वृंदावन जाओगे। कृष्ण रोम-रोम में चाहत भर देते हैं।
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