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पंच धूनी अग्नि तपस्या में पंच तत्वों की ही साधना : महंत राजेंद्र पुरी
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कुरुक्षेत्र। अखंड पंच धूणी अग्नि तपस्या करते महंत राजेंद्र पुरी।
कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में भीषण गर्मी में महंत राजेंद्र पुरी की अखंड पंच धूनी अग्नि तपस्या जारी है। नौवें दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था एवं भक्ति भाव के साथ पहुंचे, जिन्हें महंत राजेंद्र पुरी ने करीब दो दशक से की जा रही अग्नि तपस्या के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वह सनातन धर्म की आवाज बुलंद करने, विश्व शांति एवं जनकल्याण के लिए आग उगलती गर्मी में अग्नि तपस्या कर रहे हैं।
अखंड पंच धूनी अग्नि तपस्या का महत्व बहुत गहरा है। तपस्या में पांच अग्नि ढेर संदेश देते हैं कि मनुष्य शरीर पांच तत्वों से बना है तथा पंच तत्वों के द्वारा इस समस्त सृष्टि का निर्माण हुआ है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में जब लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं तथा तापमान 45 डिग्री पार चला जाता है। गर्म हवा के थपेड़े पड़ते हैं तब संत महापुरुष मानव समाज कल्याण के लिए हठ योग से अपने शरीर की सीमाओं के पार चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि अग्नि पंच महाभूतों में से एक है। इन पंच महाभूतों से ही पूरी सृष्टि का सृजन हुआ है। यदि इन तत्वों को सिद्ध कर लिया जाए तो पूरे संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वे कई वर्षों से यह साधना कर रहे हैं। उनकी साधना विश्व शांति के साथ नशा मुक्ति एवं पर्यावरण की शुद्धि के लिए भी है। उन्होंने अग्नि तपस्या के दौरान ही तंबाकू निषेध दिवस पर श्रद्धालुओं को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर बलराम स्मलेहडी, पवन शर्मा कैथल, चेतन शर्मा, नवीन शर्मा पाई, वीरेंद्र सिरसला, शुभम लाड़वा, मनप्रीत सिंह छापर, गुरदीप सिंह शाहाबाद, कमल सैनी, राकेश टोनी पिहोवा, संजय शर्मा पूर्व पार्षद, बिट्टू शर्मा, सुरेश शर्मा पिहोवा तथा जंग सिंह श्रीनगर इत्यादि ने अग्नि तपस्या सेवा में सहयोग किया।
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अखंड पंच धूनी अग्नि तपस्या का महत्व बहुत गहरा है। तपस्या में पांच अग्नि ढेर संदेश देते हैं कि मनुष्य शरीर पांच तत्वों से बना है तथा पंच तत्वों के द्वारा इस समस्त सृष्टि का निर्माण हुआ है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में जब लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं तथा तापमान 45 डिग्री पार चला जाता है। गर्म हवा के थपेड़े पड़ते हैं तब संत महापुरुष मानव समाज कल्याण के लिए हठ योग से अपने शरीर की सीमाओं के पार चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि अग्नि पंच महाभूतों में से एक है। इन पंच महाभूतों से ही पूरी सृष्टि का सृजन हुआ है। यदि इन तत्वों को सिद्ध कर लिया जाए तो पूरे संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वे कई वर्षों से यह साधना कर रहे हैं। उनकी साधना विश्व शांति के साथ नशा मुक्ति एवं पर्यावरण की शुद्धि के लिए भी है। उन्होंने अग्नि तपस्या के दौरान ही तंबाकू निषेध दिवस पर श्रद्धालुओं को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई।
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इस अवसर पर बलराम स्मलेहडी, पवन शर्मा कैथल, चेतन शर्मा, नवीन शर्मा पाई, वीरेंद्र सिरसला, शुभम लाड़वा, मनप्रीत सिंह छापर, गुरदीप सिंह शाहाबाद, कमल सैनी, राकेश टोनी पिहोवा, संजय शर्मा पूर्व पार्षद, बिट्टू शर्मा, सुरेश शर्मा पिहोवा तथा जंग सिंह श्रीनगर इत्यादि ने अग्नि तपस्या सेवा में सहयोग किया।
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