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Kurukshetra News: लग्जरी कार चुराने वाले हाईटेक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Mar 2024 01:57 AM IST
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Hi-tech interstate gang stealing luxury cars busted
कुरुक्षेत्र। सीआईए-दो ने लग्जरी कार चुराकर बेचने वाले हाईटेक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। सीआईए-दो ने कार चुराने वाले मास्टरमाइंड दीपक खन्ना निवासी उत्तम नगर व भूपिंद्र सिंह निवासी मोती नगर पश्चिमी दिल्ली के साथ उनसे चोरीशुदा कार खरीदकर बेचने वाले गुरमीत सिंह निवासी किशोर नगर ताजपुर रोड लुधियाना पंजाब को गिरफ्तार किया है। उनसे चोरीशुदा छह लग्जरी कार भी बरामद हुईं हैं। आरोपी टोयोटा कंपनी की कार को स्कैनर की मदद से चुराते थे।
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थाना सदर में दर्ज शिकायत में अमन खुराना निवासी गुरुनानक काॅलोनी पिहोवा ने बताया था कि आठ फरवरी को उसे अपनी कार में निजी काम से जयपुर जाना था। रात को उसने अपनी कार को कुरुक्षेत्र के सेक्टर-चार में अपने दोस्त के घर के सामने खड़ी किया था। अगली सुबह उसके दोस्त ने उसे कार चोरी होनी की सूचना दी थी। शिकायत पर थाना सदर थानेसर में मामला दर्ज कर जांच सीआईए-दाे ने करते हुए आरोपी गुरमीत सिंह को गिरफ्तार करके अदालत से 10 दिन के रिमांड पर लिया था। गुरमीत सिंह की निशानदेही पर पुलिस ने आरोपी दीपक खन्ना व भूपिंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया।
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आरोपियों से चोरीशुदा छह लग्जरी कार बरामद हुईं। चोरीशुदा कार जिला पानीपत, यमुनानगर, करनाल व कुरुक्षेत्र से चुराई गई थी। दो कार आई-20 व टोयोटा इनोवा को आरोपी वारदात में इस्तेमाल करते थे। साथ ही उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल स्कैनर मशीन, टूल किट, चाबियां व अन्य औजार भी बरामद हुए।
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सात दर्जन मामले दर्ज
सीआईए-दो के प्रभारी मोहन लाल ने बताया कि आरोपी दीपक खन्ना के खिलाफ दिल्ली में ही गाड़ी चोरी के करीब सात दर्जन मामले दर्ज हैं। आरोपी दीपक जिला पंचकूला अदालत से भगोड़ा भी घोषित है। आरोपी के दूसरे साथी गुरमीत सिंह के खिलाफ भी धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। आरोपी गुरमीत सिंह पंजाब से भगोड़ा आरोपी घोषित है।

स्कैनर के जरिए देते थे वारदात को अंजाम
सीआईए-दो के प्रभारी मोहन लाल ने बताया कि आरोपी दीपक खन्ना गाड़ी का शीशा तोड़कर कार स्कैनर की सहायता से मास्टर चाबी के साथ स्टार्ट करके चोरी करता था। आरोपी के पास टोयोटा कंपनी की कार की मास्टर चाबी भी थी। चोरी करने के बाद आरोपी गाड़ी को ढाई-तीन लाख रुपये में आरोपी गुरमीत सिंह को बेच देता था। उसके बाद आरोपी गुरमीत गाड़ी को फाइनेंस की बताकर या दूसरे राज्य असम व अरुणाचल प्रदेश से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाकर महंगी कीमत पर बेच देता था। अदालत के आदेश से तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।


चेारी के रुपयों से विदेशों में करते थे मौज

कुरुक्षेत्र। कार चोरी करने का मास्टरमाइंड दीपक खन्ना लग्जरी लाइफ जीना चाहता था। इसलिए 12 वीं पास कर मैकेनिक दीपक ने लग्जरी कार चुराने का हाईटेक तरीका खोज निकाला। उसने लग्जरी गाड़ियों का कोड स्कैन करने वाली मशीन का प्रबंध किया। करीब डेढ़ लाख रुपये की इस स्कैनर मशीन की मदद से दीपक 10 से 15 मिनट के भीतर ही चोरी की वारदात को अंजाम देता था।
टोयोटा कंपनी की कार उनकी पहली पसंद होती थी। कार चुराने के बाद आरोपी विदेश भाग जाते थे और चोरी के रुपयों से वहां मौज करते थे। इस काम में उसका साथी भूपिंद्र सिंह भी उसका सहयोग करता था। भूपिंद्र दिन में रेकी करता था और रात में दोनों मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।
दरअसल, दीपक ने दिल्ली में कार मैकेनिक का काम सीखा था। काम सीखने के बाद उसने अपना गैराज भी खोला मगर दीपक उस काम से संतुष्ट नहीं था। वह जल्दी पैसा कमाना चाहता था, जिसके लिए उसने अपना एक गिरोह बना लिया। इस गिरोह के जरिये उसने कार चोरी की कई वारदात को अंजाम दिया। इसी दौरान आरोपी दीपक दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया।


करीब तीन साल जेल में रहने के बाद आरोपी जमानत पर आया था। जेल में ही उसकी मुलाकात भूपिंद्र सिंह से हुई थी। गिरोह टूटने के बाद दीपक ने भूपिंद्र को अपने साथ काम पर रख लिया था। अब दोनों ने सिर्फ मांग के मुताबिक ही गाड़ियां चुराना शुरू कर दिया। गुरमीत सिंह के इशारे पर दोनों लग्जरी कार चुराकर उसे ढाई से तीन लाख रुपये में बेच देते थे। पकड़े जाने के डर से दोनों मलएशिया और अन्य देशों भाग जाते थे, क्योंकि दिल्ली पुलिस की नजर उन पर रहती थी।





ऐसे चुराते थे स्कॉर्पियो

स्कॉर्पियो की मांग होने पर आरोपी कार को अपनी कार के पीछे टोचन करके ले जाते थे फिर किसी हाईवे, ढाबे या सुनसान जगह पर स्कॉर्पियो को हैक करने का काम शुरू करते थे। टोयोटा कंपनी की गाड़ी को आरोपी स्कैनर की मदद से 10 मिनट में ही हैक कर लेते थे मगर स्कॉर्पियो को हैक करने में उनको ढाई से तीन घंटे का समय लगता था। इस दौरान उनके पकड़े जाने का खतरा भी बना रहता था। इसलिए वे टोचन के जरिये गाड़ी को सुरक्षित जगह पर लेकर जाते थे।
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