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गर्मी की मार : घटा दुग्ध उत्पादन, बढ़ी पशुपालकों की चिंता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jun 2025 02:09 AM IST
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Heat wave: Milk production reduced, cattle farmers' worries increased
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। पिछले एक सप्ताह से गर्मी चरम पर है। तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया है। आमजन के साथ-साथ पशु, पक्षी भी गर्मी की मार झेल रहे हैं। जिले में एक लाख 40 हजार भैंस व एक लाख गाय हैं, जिनमें से एक लाख दुधारू पशु हैं और प्रतिदिन आठ से नौ लाख लीटर दूध दे रहे हैं। बढ़ती गर्मी के कारण दूध उत्पादन में 20 फीसदी तक गिरावट देखने को मिली है। मार्च तक दूध उत्पादन करीब 11 लाख लीटर था। वीरवार का अधिकतम तापमान 42.1 और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
ऐसे में पशु पालकों की चिंता बढ़ने लगी है और बाजार में दूध की डिमांड वही है। आखिर तेज गर्मी के कारण दूध-उत्पादन पर इतना असर क्यों पड़ता है और गर्मी में भी पहले की तरह ही दूध-उपादन होता रहे, इसके लिए किसानों को कई अहम बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
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गर्मी के दिनों में फसलों की कटाई के बाद पशुओं के लिए हरे चारे की कमी हो जाती है। हरे चारे की कमी और तेज गर्मी के कारण पशु चाव से खाना नहीं खाते हैं, जिस कारण दूध-उत्पादन में कमी होने लगती है। पशुपालक नरेश कुमार का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में चारे की समस्या और गर्मी के कारण गाय भैंस चाव से चारा नहीं खाती, जिससे दूध में कमी का आना स्वभाविक है। वहीं पशुपालक रामपाल ने बताया कि अभी हरा चारा मिलना मुश्किल है, इसलिए मवेशियों को रूखा-सूखा और चोकर खिला रहे हैं। पहले एक भैंस नौ लीटर दूध देती थी जो अब पांच से छह लीटर दूध देने लगी है।
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