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एचसीएस अधिकारी सुमेधा बनीं आईएएस

Sun, 01 Nov 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र Updated Sun, 01 Nov 2015 12:10 AM IST
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HCS Sumedha became IAS officer
शहर के सेक्टर-7 निवासी एचसीएस अधिकारी सुमेधा कटारिया आईएएस अधिकारी बन गई हैं। विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक में सुमेधा कटारिया सहित सात अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नत करने की स्वीकृति दी गई। वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता स्व. शांता कटारिया को देती हैं।
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उन्होंने कहा कि मां ने उन्हें बेटों की तरह पाला। इसी वजह से वह आज यहां तक पहुंची हैं। उनके पिता ने सभी छह बहनों को उच्च शिक्षा दिलवाई। सुमेधा फिलहाल करनाल नगर निगम की आयुक्त हैं। अभी अधिसूचना का इंतजार है।
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मूल रूप से अबोहर पंजाब निवासी सुमेधा कटारिया लगभग 25 वर्ष से कुरुक्षेत्र में रहती हैं।

उन्होंने अपना कॅरियर 1982 में एफसी गर्ल्स कॉलेज हिसार में अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में शुरू किया। 1989 में वे कुरुक्षेत्र जिले के थानेसर ब्लाक में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नियुक्त हुईं। 1992 में एचसीएस अधिकारी बनीं।
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प्रदेश की पहली महिला बीडीपीओ थीं
सुमेधा कटारिया 1989 में हरियाणा की पहली महिला खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) नियुक्त हुईं। उनकी पहली नियुक्ति धर्म क्षेत्र में हुई थी। इसके बाद वे कुरुक्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एडीसी भी रह चुकी हैं।

छह काव्य संग्रह हो चुके हैं प्रकाशित
सुमेधा कटारिया प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ कवयित्री भी हैं। उनहे छह काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नाम अमलतास, सफल लफ्जों का, शिवामन, शरणागति, मां ठंडी छाह और मैं शरणागत मेरे साहिब हैं।

चार विषयों से हैं स्नातकोत्तर
सुमेधा कटारिया शुरू से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर रही हैं। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एमए (अंग्रेजी) किया और उसके बाद डी मोंट फाल यूनिवर्सिटी लेस्टर (यूके) से कम्यूनिटी एजुकेशन में एमए करने गईं। उन्होंने केयू से राजनीतिक शास्त्र हिंदी में एमए और बाद में एलएलबी भी की। इनकी दो बहनें स्व. नीलम कटारिया और स्व. मीनाक्षी अरोड़ा भी केंद्र सरकार में आईएएस अधिकारी रह चुकी हैं।  



सामाजिक कार्यों से है लगाव
सुमेधा कटारिया की सामाजिक कार्यों में भी रुचि है। स्वच्छता अभियान में वे जुड़ी हुई हैं। उल्लेखनीय कार्य करने के लिए उन्हें प्रदेश और केंद्र स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं। वे एक मूक-बधिर विद्यालय से भी जुड़ी हैं।
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