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हलहारिणी अमावस्या : पितरों को तर्पण करने से मिलता है विशेष लाभ
Sun, 18 Jun 2023 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 18 Jun 2023 01:20 AM IST
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कुरुक्षेत्र। खेतों में प्रयोग होने वाले यंत्रों की आषाढ़ माह में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता हैं। सनातन धर्म में पूजा पाठ के लिए आषाढ़ माह को शुभ और कल्याणकारी माना गया है। ये जानकारी गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने दी।
उन्होंने बताया कि आषाढ़ के महीने में आने वाली अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन पितरों को तर्पण करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन कृषि में प्रयोग होने वाले यंत्रों की भी पूजा की जाती हैं। चंद्र मास के अनुसार आषाढ़ वर्ष का चौथा महीना होता है, इस महीने के बाद वर्षा ऋतु की शुरुआत होती हैं। आषाढ़ की अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के पश्चात सूर्य भगवान को जल देने का विशेष महत्व है। यह अमावस्या दान-पुण्य और पितरों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन यज्ञ करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। पितरों की शांति के लिए गरीबों की सेवा करनी चाहिए और जरूरतमंदों को खाना खिलाने के साथ ही दान भी देना चाहिए। इस दिन किसी भी शुभ काम की शुरुआत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ अमावस्या पितरों के तर्पण के लिए ही नहीं बल्कि किसानों के लिए भी बेहद खास मानी जाती है। आज के दिन नदी में स्नान कर पितरों की पूजा करनी चाहिए। किसानों को खेतों में उपयोग होने वाले हल और अन्य उपकरणों की भी पूजा करनी चाहिए। ये अमावस्या तिथि पितृदोष और कालसर्प दोष, विष दोष मंगल दोष को दूर करने के लिए काफी शुभ मानी जाती है। आज के दिन यदि कुछ उपायों को अमल में लाया जाए, तो जीवन में आने वाली कई बाधाओं से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या आज हैं। आषाढ़ अमावस्या का आरंभ 17 जून शनिवार की सुबह नौ बजकर 13 मिनट से शुरू हुआ और 18 को सुबह 10 बजकर आठ मिनट पर इसका समापन होगा। अमावस्या उदय तिथि में तीन मुहूर्त से ज्यादा आज होने के कारण रविवार को मनाई जाएगी।
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उन्होंने बताया कि आषाढ़ के महीने में आने वाली अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन पितरों को तर्पण करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन कृषि में प्रयोग होने वाले यंत्रों की भी पूजा की जाती हैं। चंद्र मास के अनुसार आषाढ़ वर्ष का चौथा महीना होता है, इस महीने के बाद वर्षा ऋतु की शुरुआत होती हैं। आषाढ़ की अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के पश्चात सूर्य भगवान को जल देने का विशेष महत्व है। यह अमावस्या दान-पुण्य और पितरों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन यज्ञ करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। पितरों की शांति के लिए गरीबों की सेवा करनी चाहिए और जरूरतमंदों को खाना खिलाने के साथ ही दान भी देना चाहिए। इस दिन किसी भी शुभ काम की शुरुआत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ अमावस्या पितरों के तर्पण के लिए ही नहीं बल्कि किसानों के लिए भी बेहद खास मानी जाती है। आज के दिन नदी में स्नान कर पितरों की पूजा करनी चाहिए। किसानों को खेतों में उपयोग होने वाले हल और अन्य उपकरणों की भी पूजा करनी चाहिए। ये अमावस्या तिथि पितृदोष और कालसर्प दोष, विष दोष मंगल दोष को दूर करने के लिए काफी शुभ मानी जाती है। आज के दिन यदि कुछ उपायों को अमल में लाया जाए, तो जीवन में आने वाली कई बाधाओं से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
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तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या आज हैं। आषाढ़ अमावस्या का आरंभ 17 जून शनिवार की सुबह नौ बजकर 13 मिनट से शुरू हुआ और 18 को सुबह 10 बजकर आठ मिनट पर इसका समापन होगा। अमावस्या उदय तिथि में तीन मुहूर्त से ज्यादा आज होने के कारण रविवार को मनाई जाएगी।
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