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नियमितीकरण पर तीन माह में फैसला ले सरकार : कोर्ट
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कुरुक्षेत्र। ठेकेदारों के माध्यम से 10 से 15 साल से काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को तीन माह में निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने सोहन लाल व अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि कर्मचारियों के मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर की जाए, इसके बाद कर्मचारियों को सुनवाई का अवसर देकर कारण सहित आदेश पारित किया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा था कि वे लंबे समय से ठेकेदारों के माध्यम से संबंधित विभाग या विश्वविद्यालय में हेल्पर, माली, इलेक्ट्रीशियन और कारपेंटर के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर काम करते हुए उनको 15 साल तक हो जाते हैं, इसके बावजूद उन्हें नियमितीकरण का लाभ नहीं मिलता। याचिका में हरियाणा सरकार की नियमितीकरण नीति के तहत उनकी सेवाएं नियमित करने की मांग की गई थी। उधर, केयू के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल का कहना है कि अभी अदालत के आदेश की प्रति उनके पास पहुंची नहीं है। आदेश को देखने के बाद ही संज्ञान लिया जाएगा।
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न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने सोहन लाल व अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि कर्मचारियों के मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर की जाए, इसके बाद कर्मचारियों को सुनवाई का अवसर देकर कारण सहित आदेश पारित किया जाए।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा था कि वे लंबे समय से ठेकेदारों के माध्यम से संबंधित विभाग या विश्वविद्यालय में हेल्पर, माली, इलेक्ट्रीशियन और कारपेंटर के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर काम करते हुए उनको 15 साल तक हो जाते हैं, इसके बावजूद उन्हें नियमितीकरण का लाभ नहीं मिलता। याचिका में हरियाणा सरकार की नियमितीकरण नीति के तहत उनकी सेवाएं नियमित करने की मांग की गई थी। उधर, केयू के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल का कहना है कि अभी अदालत के आदेश की प्रति उनके पास पहुंची नहीं है। आदेश को देखने के बाद ही संज्ञान लिया जाएगा।
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