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आज से गेहूं की सरकारी खरीद, आढ़तियों को नहीं मिला बारदाना
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू हो जाएगी। वहीं आढ़ती व किसानों में भुगतान को लेकर संशय बरकरार है। अभी तक आढ़तियों को बारदाना भी नहीं मिला है और मंडियों में भी कोई तैयारी नहीं है। वहीं खरीद के नए नियम को लेकर आढ़तियों में सरकार के खिलाफ रोष बना हुआ है। नए नियम को लेकर आढ़तियों ने बैठक करके सरकार के खिलाफ जाने की चेतावनी दी है। वहीं जिला प्रशासन खरीद को लेकर इंतजाम के दावे कर रहा है।
डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने बुधवार को खरीद को लेकर अधिकारियों की बैठक ली। अभी तक मंडियों में फड़ की सफाई नहीं हुई है। मंडी की सड़कों की हालत खस्ता है। थानेसर मंडी के आढ़ती बलविंद्र सिंह ने बताया कि एक सप्ताह पहले आढ़तियों का शिष्टमंडल मांगों के समर्थन में डीसी से मिला था। अभी तक उनकी मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अभी तक आढ़तियों को बारदाना भी मुहैया नहीं कराया गया है, जबकि प्रशासन एक अप्रैल से खरीद शुरू करने के दावे कर रहा है। उन्होंने बैठक में डीसी से 90 प्रतिशत बारदाना पहले मुहैया कराने की मांग रखी। थानेसर मंडी में आढ़तियों की करीब 235 दुकान है। किसी को भी बारदाना उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उन्होंने कहा कि आढ़तियों ने डीसी के माध्यम से सरकार के समक्ष मांग रखी थी कि भुगतान आढ़ती के माध्यम से किया जाए। भुगतान को लेकर आढ़ती व किसान दोनों में अभी भी संशय में है। उधर, इस्माईलाबाद मंडी के हालात बदतर है। अनाज खरीदना तो दूर की बात अभी तक अनाज मंडी फड़, सड़कों की साफ सफाई व मरम्मत का कार्य भी शुरू नहीं हुआ। अनाज डालने के लिए बने फड़ पर बजरी उखड़ी है, अगर इस फड़ पर गेहूं डाला गया तो उसमेेें बजरी मिक्स हो सकती है। इसके अलावा अनाज मंडी की सड़कों की हालत भी खस्ता है, जिससे किसानों को अनाज मंडी में गेहूं लेकर आने में काफी दिक्कत होगी है।
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इसके अलावा अनाज मंडी में पानी, बिजली की व्यवस्था का काम भी अधूरा है। वहीं किसानों की ओर से पोर्टल के माध्यम से कराया गया फसल पंजीकरण उनके जी का जंजाल बना है। पंजीकरण के लिए किसानों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसान अमित मेहता ने बताया कि उसने 18 एकड़ गेहूं की फसल का पंजीकरण कराया था। पोर्टल की खामी के कारण उसकी आठ एकड़ गेहूं का ही पंजीकरण हो पाया है। उसे अब अपनी 10 एकड़ गेहूं को बेचने की चिंता सताने लगी है, क्योंकि सरकार का एलान है कि पंजीकरण के बगैर फसल खरीद नहीं की जाएगी।
बैठक कर लिया जाएगा निर्णय
स्टेट मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि नई व्यवस्था का खामियाजा आढ़ती, मजदूर व किसान सभी को भुगतना पड़ रहा है। गत सीजन की पेमेंट अभी तक अटकी है। भाजपा सरकार मंडी व्यवस्था को खत्म करना चाहती है। गेहूं की फसल का पैसा सीधा किसान के खाते में जाने से आढ़ती पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। जल्द ही प्रदेश स्तर पर बैठक कर कठोर निर्णय लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ बिगुल बजाया जाएगा।
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कुरुक्षेत्र। गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू हो जाएगी। वहीं आढ़ती व किसानों में भुगतान को लेकर संशय बरकरार है। अभी तक आढ़तियों को बारदाना भी नहीं मिला है और मंडियों में भी कोई तैयारी नहीं है। वहीं खरीद के नए नियम को लेकर आढ़तियों में सरकार के खिलाफ रोष बना हुआ है। नए नियम को लेकर आढ़तियों ने बैठक करके सरकार के खिलाफ जाने की चेतावनी दी है। वहीं जिला प्रशासन खरीद को लेकर इंतजाम के दावे कर रहा है।
डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने बुधवार को खरीद को लेकर अधिकारियों की बैठक ली। अभी तक मंडियों में फड़ की सफाई नहीं हुई है। मंडी की सड़कों की हालत खस्ता है। थानेसर मंडी के आढ़ती बलविंद्र सिंह ने बताया कि एक सप्ताह पहले आढ़तियों का शिष्टमंडल मांगों के समर्थन में डीसी से मिला था। अभी तक उनकी मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अभी तक आढ़तियों को बारदाना भी मुहैया नहीं कराया गया है, जबकि प्रशासन एक अप्रैल से खरीद शुरू करने के दावे कर रहा है। उन्होंने बैठक में डीसी से 90 प्रतिशत बारदाना पहले मुहैया कराने की मांग रखी। थानेसर मंडी में आढ़तियों की करीब 235 दुकान है। किसी को भी बारदाना उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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उन्होंने कहा कि आढ़तियों ने डीसी के माध्यम से सरकार के समक्ष मांग रखी थी कि भुगतान आढ़ती के माध्यम से किया जाए। भुगतान को लेकर आढ़ती व किसान दोनों में अभी भी संशय में है। उधर, इस्माईलाबाद मंडी के हालात बदतर है। अनाज खरीदना तो दूर की बात अभी तक अनाज मंडी फड़, सड़कों की साफ सफाई व मरम्मत का कार्य भी शुरू नहीं हुआ। अनाज डालने के लिए बने फड़ पर बजरी उखड़ी है, अगर इस फड़ पर गेहूं डाला गया तो उसमेेें बजरी मिक्स हो सकती है। इसके अलावा अनाज मंडी की सड़कों की हालत भी खस्ता है, जिससे किसानों को अनाज मंडी में गेहूं लेकर आने में काफी दिक्कत होगी है।
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इसके अलावा अनाज मंडी में पानी, बिजली की व्यवस्था का काम भी अधूरा है। वहीं किसानों की ओर से पोर्टल के माध्यम से कराया गया फसल पंजीकरण उनके जी का जंजाल बना है। पंजीकरण के लिए किसानों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसान अमित मेहता ने बताया कि उसने 18 एकड़ गेहूं की फसल का पंजीकरण कराया था। पोर्टल की खामी के कारण उसकी आठ एकड़ गेहूं का ही पंजीकरण हो पाया है। उसे अब अपनी 10 एकड़ गेहूं को बेचने की चिंता सताने लगी है, क्योंकि सरकार का एलान है कि पंजीकरण के बगैर फसल खरीद नहीं की जाएगी।
बैठक कर लिया जाएगा निर्णय
स्टेट मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि नई व्यवस्था का खामियाजा आढ़ती, मजदूर व किसान सभी को भुगतना पड़ रहा है। गत सीजन की पेमेंट अभी तक अटकी है। भाजपा सरकार मंडी व्यवस्था को खत्म करना चाहती है। गेहूं की फसल का पैसा सीधा किसान के खाते में जाने से आढ़ती पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। जल्द ही प्रदेश स्तर पर बैठक कर कठोर निर्णय लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ बिगुल बजाया जाएगा।