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आदि बद्री में जलाशय परियोजना के लिए सरकार ने किया 800 करोड़ का प्रावधान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 01:30 AM IST
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Government made a provision of 800 crores for the reservoir project in Adi Badri
कुरुक्षेत्र।हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह। - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। सरस्वती नदी का उद्गम स्थल हरियाणा प्रदेश में आदि बद्री यमुनानगर में है। इस स्थल पर सरकार की तरफ से डैम, बैराज और सरस्वती सरोवर का निर्माण करने की परियोजना के लिए 800 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस परियोजना के तहत बाढ़ के पानी से प्रभावित तकरीबन 894 हेक्टेयर भूमि पर बरसात के समय आने वाले पानी का प्रबंध किया जाएगा।
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यह जानकारी हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किमिच ने दी। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर लाने के प्रयास सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। वेदों की रचना और पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश भी इसी पवित्र नदी के किनारे पर जन्मे और इस नदी के बारे में जितनी भी शंका थी, उनका समाधान किया जा चुका है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह साबित हो चुका है कि हरियाणा की गोद से ही पवित्र नदी सरस्वती का प्रवाह करीब पांच से सात हजार वर्ष पुराना रहा है और वैदिक काल में इसका उद्गम स्थल आदि बद्री रहा है। प्राचीन काल में सबसे बड़ी और पवित्र नदियों में सरस्वती नदी का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
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उत्तर वैदिक व महाभारत काल में भी सरस्वती नदी के प्रवाहित होने के साक्ष्य मिले हैं और यह नदी समय बीतने के साथ विलुप्त हो गई। शिवालिक पहाड़ियों से निकलकर हरियाणा के आदि बद्री में प्रवेश करने वाली इस नदी को तीर्थ स्थल के रूप में देखा जाता है। यह नदी आदि बद्री लेकर कुरुक्षेत्र, कैथल, सिरसा से होती हुई गुजरात के कच्छ तक पहुंचती है। इस नदी के किनारे बड़े जलाशय और तालाब आज भी पवित्र नदी के बहने के साक्ष्य के रूप में देखे जाते हैं। यदि हड़प्पा सभ्यता की 2600 बस्तियों को देखें तो पाते हैं कि वर्तमान पाकिस्तान में सिंधु तट पर मात्र 265 बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं।
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उन्होंने कहा कि इसरो सहित 70 से ज्यादा शोध केंद्र सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर प्रवाहित करने के लिए काम कर रहे हैं। इस नदी के किनारे हड़प्पा संस्कृति के भी अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों की कहानी से हरियाणा प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत की तस्वीर नजर आती है। इस विलुप्त नदी का पता लगाने और शोध करने के लिए वर्ष 2015 में हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की स्थापना की गई, ताकि हरियाणा की संस्कृति और विरासत को संजोकर रखा जा सके। इसके लिए सरकार की तरफ से योजना को अंतिम रूप दिया गया।
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