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Kurukshetra News: सुनहरा हुआ श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ, पर्यटकों के ठहर रहे कदम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Nov 2023 01:49 AM IST
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Golden Krishna-Arjuna chariot, tourists staying footsteps
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पुरुषोत्तमपुरा बाग स्थित श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ को 15 साल बाद पहली बार सुनहरा रूप मिला है। इससे अब इस रथ को निहारने वाले पर्यटकों को विशेष अनुभूति का एहसास होगा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के इस प्रयास से न केवल कुरुक्षेत्र की पहचान बने इस रथ को नया लुक मिला है बल्कि यह जीवंत हो उठा है। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव से कुछ दिन पहले रथ के इस रूप को देखकर यहां आने वाले हर किसी पर्यटक के कदम ठहर जा रहे हैं।
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बता दें कि 28 जुलाई, 2008 को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस रथ का उद्घाटन किया था और यह रथ धर्मनगरी की विशेष पहचान बन चुका है। यहां आने वाला हर पर्यटक रथ को देखने पहुंचता है तो वहीं यह बड़ा सेल्फी प्वाइंट भी बन चुका है। लोग रथ के साथ लिए चित्रों को वर्षाें तक संजोकर रखते हैं। यहां तक कि इसी रथ के पास ही हवन यज्ञ के साथ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ किया जाता है और अब तक महोत्सव में मुख्यातिथि रहे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, द्रोपदी मुर्मू के अलावा विभिन्न देशों के राजनेता व राजदूत, राज्यपाल व मुख्यमंत्री भी इस रथ के समक्ष सामूहिक फोटो खिंचवा चुके हैं।
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श्रीकृष्ण-अर्जुन के मुकुट, वस्त्र, घोड़ों के वस्त्र तक हुए सुनहरे
यहां स्थापित करने के बाद यह रथ अब तक कॉपर कलर में ही दिखाई दिया जाता रहा। हालांकि स्थापना के उपरांत करीब चार वर्ष पहले भी पेंट किया गया, लेकिन यह कॉपर कलर ही था। अब डबल टोन दिया गया है, जिसमें श्रीकृष्ण-अर्जुन के मुकुट, वस्त्र, घोड़ों के वस्त्र, रथ के पहियों को भी सुनहरा रूप दिया गया है।
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35 फुट ऊंचा और 45 टन रथ का है वजन
श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश देने के दौरान की रथ की यह प्रतिमा कांस्य धातु से बनी हुई है, जो 35 फुट ऊंची है। इसका वजन 45 टन है। इसे बनाने में दो करोड़ रुपये खर्च हुए थे। रथ के ऊपरी भाग पर हनुमान जी विराजमान हैं। इस मूर्ति में शैव्य, सुग्रीव, मेघवाहन और पुष्कर नामक चार घोड़ों द्वारा खींचे जा रहे रथ को दर्शाया गया है। हालांकि धर्मनगरी में कृष्ण-अर्जुन रथ की कई मूर्तियां बनी हुई हैं। इनमें गीता द्वार, पिपली, रेलवे स्टेशन , बिरला मंदिर, ज्योतिसर तीर्थ मुख्य है, लेकिन ब्रह्मसरोवर पर बनीं यह सबसे बड़ी मूर्ति है और हर पर्यटक इसे देखकर गदगद हो उठता है। इसकी संरचना प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार द्वारा की गई थी।




रथ की बढ़ाई गई है खूबसूरती : उपेंद्र
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि रथ की खूबसूरती बढ़ाई गई है, ताकि यहां आने वाले हर पर्यटक के लिए यह आकर्षण का केंद्र रहे। यह पहली बार प्रयास किया गया है कि रथ को डबल टोन के साथ नई रंगत दी गई है। इसके साथ ही अब यहां रथ से ऐसी ध्वनि भी सुनाई देगी कि मानों रथ पर सवार श्रीकृष्ण उसी दौरान गीता का उपदेश दे रहे हैं।
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