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Kurukshetra News: गीता महोत्सव महिलाओं के सपनों को लगा रहा पंख
Sun, 16 Nov 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 16 Nov 2025 01:19 AM IST
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कुरुक्षेत्र। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सत्या देवी की स्टॉल से खरीदारी करती महिला। संवाद
- फोटो : ramnagar news
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव न केवल संस्कृति और अध्यात्म का संगम है, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक बड़ा मंच भी बनकर उभरा है। महोत्सव में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की ओर से तैयार किए गए उत्पाद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। सरकार की ओर से महिलाओं को 80 मुफ्त स्टॉल आवंटित कराए गए हैं, जिनमें विभिन्न प्रदेशों की महिलाएं अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हैंडमेड ज्वेलरी, फूड आइटम्स, क्रोशिया वर्क, लकड़ी की कारीगरी, चूड़ियां, पेंटिंग और हैंडलूम उत्पादों की खूबसूरती देखने को मिल रही है। हर स्टॉल पर महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता झलक रही है, जिससे न केवल उनकी कला को नई पहचान मिल रही है बल्कि आर्थिक मजबूती का रास्ता भी खुल रहा है। इससे महिलाओं को न केवल व्यापक बाजार मिला है, बल्कि उनके उत्पादों को नई पहचान भी मिली है।
यमुनानगर की शालिनी ने बताया कि मैंने घर पर ही क्रोशिया और वूल वर्क सीखकर छोटे स्तर पर काम शुरू किया था। गीता महोत्सव में पहली बार स्टॉल मिला है। यहां इतनी भीड़ और पहले दिन बिक्री देखकर बहुत उत्साहित हूं।
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कुरुक्षेत्र की सत्या देवी ने बताया कि मैं अपना हैंडमेड झूलने-पालकी और डेकोरेटिव सामान का कारोबार बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन प्लेटफॉर्म नहीं था। यहां फ्री स्टॉल मिलने से हमें मौका मिला कि हम अपना काम लोगों तक पहुंचा सकें। यहां आने वाले ग्राहक हमारी कला की खूब सराहना कर रहे हैं।
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स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हैंडमेड ज्वेलरी, फूड आइटम्स, क्रोशिया वर्क, लकड़ी की कारीगरी, चूड़ियां, पेंटिंग और हैंडलूम उत्पादों की खूबसूरती देखने को मिल रही है। हर स्टॉल पर महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता झलक रही है, जिससे न केवल उनकी कला को नई पहचान मिल रही है बल्कि आर्थिक मजबूती का रास्ता भी खुल रहा है। इससे महिलाओं को न केवल व्यापक बाजार मिला है, बल्कि उनके उत्पादों को नई पहचान भी मिली है।
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यमुनानगर की शालिनी ने बताया कि मैंने घर पर ही क्रोशिया और वूल वर्क सीखकर छोटे स्तर पर काम शुरू किया था। गीता महोत्सव में पहली बार स्टॉल मिला है। यहां इतनी भीड़ और पहले दिन बिक्री देखकर बहुत उत्साहित हूं।
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कुरुक्षेत्र की सत्या देवी ने बताया कि मैं अपना हैंडमेड झूलने-पालकी और डेकोरेटिव सामान का कारोबार बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन प्लेटफॉर्म नहीं था। यहां फ्री स्टॉल मिलने से हमें मौका मिला कि हम अपना काम लोगों तक पहुंचा सकें। यहां आने वाले ग्राहक हमारी कला की खूब सराहना कर रहे हैं।