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पराली जलाने पर चार किसानों का चालान, 10 हजार रुपये जुर्माना किया
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कुरुक्षेत्र। जिले में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके तहत वीरवार को चार किसानों का चालान कर उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना किया। जिले में अब तक इस तरह के करीब 18 मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन ने अब पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इसके तहत अब तक 14 किसानों के चालान कर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी किया जा चुका है। वहीं निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल का कहना है कि प्रशासन का लक्ष्य है कि किसान पराली में आग लगाने की बजाए प्रबंधन कर प्रति एकड़ एक हजार रुपये का आर्थिक लाभ प्राप्त करे। पर्यावरण को बचाने, भूमि के कीट मित्रों के साथ-साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए पराली में आग न लगाकर पराली का प्रबंधन करने में किसानों को जागरूकता दिखानी चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है कि पराली व अवशेषों को आग लगाने की बजाए पराली का प्रबंधन करके आर्थिक रुप से लाभ लिया जा सकता है।
सरकार द्वारा पराली का प्रबंधन करने के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके साथ ही इस वर्ष जो किसान गैर बासमती तथा बासमती किस्म के धान के खेत में हैपी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल प्लो, जीरो टिलर, रोटावेटर, हैरो इत्यादि द्वारा पराली अवशेषों को भूमि में मिलाएगा, उसे भी एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। डॉ. प्रदीप मील के नेतृत्व में सीआरएम स्कीम 2022-23 के तहत किसानों को फसल अवशेषों का प्रबंधन करने, फसल अवशेषों में आग न लगाने वाले जैसे विषयों को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है।
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126 गांवों में किए जा चुके है कार्यक्रम
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल ने बताया कि जागरुकता कार्यक्रम के तहत 126 गांव में कार्यक्रम किए गए, ब्लाक स्तर पर चार कार्यक्रमों, दो किसान मेला, 40 जगहों पर फलेक्स और अन्य प्रचार सामग्री तथा 150 जगहों पर जिनमें मंडी, मुख्य मार्गों, बाजार, पेट्रोल पंप व पंचायतों में होर्डिंग्स लगाए गए, 24 हजार पर्चे कार्यक्रमों के जरिए बांटे गए, दिल्ली दूरदर्शन भी कार्यक्रमों का प्रसारण हुआ, 150 से ज्यादा वॉल पेंटिंग की गई, पांच जागरुकता वैन गांव-गांव पहुंच रही हैं। स्कूल और कॉलेजों में भी 35 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और करीब 3900 विद्यार्थियों को इस जागरूकता कार्यक्रम के साथ जोड़ा गया।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल का कहना है कि प्रशासन का लक्ष्य है कि किसान पराली में आग लगाने की बजाए प्रबंधन कर प्रति एकड़ एक हजार रुपये का आर्थिक लाभ प्राप्त करे। पर्यावरण को बचाने, भूमि के कीट मित्रों के साथ-साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए पराली में आग न लगाकर पराली का प्रबंधन करने में किसानों को जागरूकता दिखानी चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है कि पराली व अवशेषों को आग लगाने की बजाए पराली का प्रबंधन करके आर्थिक रुप से लाभ लिया जा सकता है।
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सरकार द्वारा पराली का प्रबंधन करने के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके साथ ही इस वर्ष जो किसान गैर बासमती तथा बासमती किस्म के धान के खेत में हैपी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल प्लो, जीरो टिलर, रोटावेटर, हैरो इत्यादि द्वारा पराली अवशेषों को भूमि में मिलाएगा, उसे भी एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। डॉ. प्रदीप मील के नेतृत्व में सीआरएम स्कीम 2022-23 के तहत किसानों को फसल अवशेषों का प्रबंधन करने, फसल अवशेषों में आग न लगाने वाले जैसे विषयों को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है।
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126 गांवों में किए जा चुके है कार्यक्रम
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल ने बताया कि जागरुकता कार्यक्रम के तहत 126 गांव में कार्यक्रम किए गए, ब्लाक स्तर पर चार कार्यक्रमों, दो किसान मेला, 40 जगहों पर फलेक्स और अन्य प्रचार सामग्री तथा 150 जगहों पर जिनमें मंडी, मुख्य मार्गों, बाजार, पेट्रोल पंप व पंचायतों में होर्डिंग्स लगाए गए, 24 हजार पर्चे कार्यक्रमों के जरिए बांटे गए, दिल्ली दूरदर्शन भी कार्यक्रमों का प्रसारण हुआ, 150 से ज्यादा वॉल पेंटिंग की गई, पांच जागरुकता वैन गांव-गांव पहुंच रही हैं। स्कूल और कॉलेजों में भी 35 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और करीब 3900 विद्यार्थियों को इस जागरूकता कार्यक्रम के साथ जोड़ा गया।