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Kurukshetra News: चैत्र चौदस मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्नान-पूजन संग श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान

Tue, 21 Mar 2023 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 21 Mar 2023 01:52 AM IST
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Flood of faith gathered in Chaitra Chaudas fair, devotees performed pinddaan with bath and worship
पिहोवा। चैत्र चौदस मेले के दूसरे दिन सोमवार को पंजाब, हिमाचल, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, चंडीगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे। साथ ही स्नान के बाद पूजा अर्चना कर पिंडदान किया। इसमें सबसे ज्यादा संख्या पंजाब से आने वाले सिख श्रद्धालुओं की रही।
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चैत्र चौदस मेले ने हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। दोनों समुदाय के लोग इस तीर्थ के पवित्र जल में एक साथ डुबकी लगाकर अपने पितरों की शांति के लिए कामना करते नजर आए। चैत्र चौदस मेले के दूसरे दिन सुबह होते ही हिंदू सिख एकता का दृश्य हजारों साल पुरानी परंपरा को बयां कर रहा था। खास बात यह है कि राजस्थान-हिमाचल और पंजाब से आने वाले कुछ परिवार पूरे एक साल इस मेले के आने का इंतजार करते हैं। इस मेले के जरिए ही इन परिवारों में दोस्ताना संबंध स्थापित हुए। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि वे हर वर्ष चैत्र चौदस मेले में पितरों की आत्मिक शांति के लिए आते हैं। दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पुरोहितों से वंशावली भी देखी। सुबह के समय ही काफी संख्या में श्रद्धालु सरस्वती मां की जय जयकार करते हुए पावन सरस्वती तीर्थ पर स्नान के लिए पहुंचे। फिर पावन जल में श्रद्धा की डुबकी लगा अपने पितरों को जल अर्पित किया।
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यह हिंदू-सिख एकता का रहस्य
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पिहोवा में सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी, छठी पातशाही गुरु हरगोबिंद, नौवीं पातशाही गुरु तेग बहादुर व 10वीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी इस पवित्र शहर में आए। इसी प्रकार भगवान शिव, भगवान श्री कृष्ण सहित अनेक देवी देवता इस धर्मनगरी से जुड़े रहे हैं। माना जाता है कि इसी के चलते ही चैत्र चौदस मेले पर दोनों समुदाय के लोग श्रद्धा भाव से आते हैं।
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श्रद्धालुओं ने खरीदारी
श्रद्धालुओं ने सरस्वती तीर्थ के आसपास दुकानों पर जमकर खरीदारी की। तहसील रोड, मेन बाजार, सरस्वती चौक, गुरुद्वारा रोड आदि जगहों पर दुकानदारों ने बच्चों के लिए प्लास्टिक, लकड़ी और लोहे से बनाए गए आकर्षक खिलौने रखे थे। हर दुकान पर खिलौने खरीदने और देखने वालों की भीड़ लगी रही।


पितरों के पिंडदान से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि यहां पर जो भी श्रद्धालु अपने पितरों का पिंडदान कर उनको जल अर्पण करते हैं, उनके पितर प्रसन्न होकर परिवार में सुख समृद्धि की वर्षा करते हैं। श्रद्धालुओं ने पिंडदान के बाद प्रेत पीपल पर जल व स्वामी कार्तिकेय मंदिर में तेल व दरगाही शाह पर घोड़े चढ़ाए। श्रद्धालुओं ने बीती रात पावन सरस्वती तट पर दीप दान भी किया, जिससे सरोवर का दृश्य मनोहारी हो गया।


भंडारों से की श्रद्धालुओं की सेवा
पावन चैत्र चौदस मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं की सेवा के लिए नगर वासियों व विभिन्न शहरों से आए लोगों ने जगह-जगह भंडारे लगाए। भंडारों का आलम यह था कि सरस्वती तीर्थ, पवन मार्केट कमेटी, गोल मार्किट, अंबाला रोड, अनाज मंडी, गुहला रोड, गुरुद्वारा रोड, प्राची तीर्थ सहित कई अन्य स्थानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं को वितरित किए जा रहे अटूट लंगर को देखकर ऐसा लग रहा था मानो शहर का हर नागरिक श्रद्धालुओं की सेवा में लगा हुआ है।


विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
चैत्र चौदस मेले में आए श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए जिला सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा रात को विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकारों ने गीतों व भजनों के माध्यम से जहां लोगों को परमात्मा का संदेश दिया, वहीं उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के प्रति भी जागरूक किया।
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