{"_id":"68c9c879eb2a43aec70e7851","slug":"experts-gave-information-about-the-use-of-yoga-ayurveda-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-142227-2025-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: विशेषज्ञों ने योग-आयुर्वेद के उपयोग की जानकारी दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: विशेषज्ञों ने योग-आयुर्वेद के उपयोग की जानकारी दी
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में प्रतिभा
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के शालाक्य तंत्र विभाग की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक योग-आयुर्वेद के समन्वित उपयोग की जानकारी दी गई। तिलक आयुर्वेदिक कॉलेज, महाराष्ट्र के शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. संगीता सालवी और राजकीय अखंडानंद आयुर्वेदिक कॉलेज, अहमदाबाद (गुजरात) के सेवानिवृत्त प्रो. वैद्य हरिद्रा दवे ने व्याख्यान देकर विद्यार्थियों और चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया।
पहले सत्र में प्रो. संगीता सालवी ने मुख और कंठ रोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ओष्ठ (होठ) और गल रोग में बनने वाली गांठों के लक्षण, निदान और उपचार की जानकारी दी। प्रतिभागियों को एंडोस्कोपी मशीन की लाइव ट्रेनिंग दी गई जिसमें रोग निदान के सूक्ष्म पहलुओं को समझाया गया। उन्होंने कहा कि कर्णस्त्राव (कान का बहना) बच्चों में एक गंभीर समस्या है, जो मुख्यत: 10 वर्ष से कम आयु में अधिक होती है। कान और नाक को जोड़ने वाली नली छोटी होने के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है। प्रो. सालवी ने चेताया कि यदि बच्चों को बार-बार जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत हो तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि ये लक्षण कर्णस्त्राव का कारण बन सकते हैं। समय रहते चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। कार्यक्रम में आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज कुमार तंवर समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
योग क्रिया और आयुर्वेद से दंत चिकित्सा में नई दिशा
दूसरे सत्र में प्रो. वैद्य हरिद्रा दवे ने दंत चिकित्सा में योग और आयुर्वेद के प्रयोग पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि योग क्रिया जालंधर बंध, एक्यूप्रेशर और आयुर्वेदिक सिद्धांतों की मदद से दांत को बिना दर्द के निकाला जा सकता है। उन्होंने मंच से जालंधर बंध के जरिये मुंह के एक हिस्से को कुछ समय के लिए सुन्न करके प्रदर्शन भी किया, जिसे देखकर छात्र और शिक्षक आश्चर्यचकित रह गए। वैद्य हरिद्रा दवे ने कहा कि आयुर्वेद और योग का वैज्ञानिक संयोजन, आधुनिक चिकित्सा को नई ऊर्जा दे सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इन विधियों से मरीजों का डर कम होता है और उपचार अधिक सहज बन जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पहले सत्र में प्रो. संगीता सालवी ने मुख और कंठ रोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ओष्ठ (होठ) और गल रोग में बनने वाली गांठों के लक्षण, निदान और उपचार की जानकारी दी। प्रतिभागियों को एंडोस्कोपी मशीन की लाइव ट्रेनिंग दी गई जिसमें रोग निदान के सूक्ष्म पहलुओं को समझाया गया। उन्होंने कहा कि कर्णस्त्राव (कान का बहना) बच्चों में एक गंभीर समस्या है, जो मुख्यत: 10 वर्ष से कम आयु में अधिक होती है। कान और नाक को जोड़ने वाली नली छोटी होने के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है। प्रो. सालवी ने चेताया कि यदि बच्चों को बार-बार जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत हो तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि ये लक्षण कर्णस्त्राव का कारण बन सकते हैं। समय रहते चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। कार्यक्रम में आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज कुमार तंवर समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
विज्ञापन
योग क्रिया और आयुर्वेद से दंत चिकित्सा में नई दिशा
दूसरे सत्र में प्रो. वैद्य हरिद्रा दवे ने दंत चिकित्सा में योग और आयुर्वेद के प्रयोग पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि योग क्रिया जालंधर बंध, एक्यूप्रेशर और आयुर्वेदिक सिद्धांतों की मदद से दांत को बिना दर्द के निकाला जा सकता है। उन्होंने मंच से जालंधर बंध के जरिये मुंह के एक हिस्से को कुछ समय के लिए सुन्न करके प्रदर्शन भी किया, जिसे देखकर छात्र और शिक्षक आश्चर्यचकित रह गए। वैद्य हरिद्रा दवे ने कहा कि आयुर्वेद और योग का वैज्ञानिक संयोजन, आधुनिक चिकित्सा को नई ऊर्जा दे सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इन विधियों से मरीजों का डर कम होता है और उपचार अधिक सहज बन जाता है।
विज्ञापन