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Kurukshetra News: सेंधमारी में लगे महारथी, रातों-रात बदल रहे समीकरण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2024 06:20 AM IST
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Experts engaged in burglary, equations changing overnight
कुरुक्षेत्र। मतदान की तारीख नजदीक आते ही चुनाव मैदान में उतरे महारथियों ने वोटरों को अपने पाले में करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। हर कोई एक-दूसरे को मात देने के लिए चाणक्य नीति पर आगे बढ़ रहा है। दिन ही नहीं रात को भी ये महारथी जमकर पसीना बहा रहे हैं। जहां अपने वोट बैंक को बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है वहीं विरोधी के वोट बैंक को कमजोर करना भी बड़ा लक्ष्य है, जिसके लिए रातोंरात सेंधमारी की जा रही है। ऐसे में पल-पल समीकरण भी बदल रहे हैं। चुनाव की इस जंग में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा यह तो परिणाम आने के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन ये महारथी अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे।
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जोड़तोड़ के लिए फील्ड में उतारी टीमें
चुनावी मैदान में उतरे योद्धा हर वर्ग तक पैंठ बनाने में लगे हैं। यहां तक संबंधित वर्ग के अगुवाई करने वाले लोगों को अपने साथ जोड़ने और इसका बड़ा संदेश आम लोगों में देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जोड़तोड़ के इस खेल को पार लगाने के लिए बाकायदा टीमें मैदान में उतारी हुई है, जो मौका मिलते ही रणनीति के तहत मैदान मार लेने में लगी होती है। यही कारण है कि जो लोग सुबह किसी योद्धा के साथ होते हैं तो शाम ढलने तक दूसरे के पक्ष में दिखाई देने लगते हैं। सुबह होने पर उसके नए परिणाम भी आने लगते हैं। इसके लिए मान-सम्मान से लेकर फिर भले ही कितना बड़ा भरोसा देना पड़े। ऐसे में किसी का जिंदगी भर का भरोसा टूट रहा है तो किसी का जुड़ भी रहा है।
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रूठों को मनाने में भी छूट रहे पसीने
सियासी कुर्सी हासिल करनी है, जिसके लिए मैदान में आए महारथियों को हर तरह के प्रयास करने को मजबूर होना पड़ रहा है। जो चिर विरोधी रहे, उनका भी मान-मनौव्वल किया जा रहा है। सबसे ज्यादा पसीने रूठे हुए अपनों ने ही छुड़ाए हुए हैं। कोई टिकट न मिलने से रूठा है तो कोई दूसरे को अधिक तव्वजो दिए जाने से, ऐसे में इन रूठों को मनाने के लिए अब राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं को भी मोर्चा संभालना पड़ रहा है। धर्मनगरी की चुनाव महाभारत में भी कई बड़े नेता अभी तक इसके लिए दस्तक दे चुके हैं। इसके बावजूद भी रूठों का दर्द पूरी तरह से कम नहीं होता दिखाई दे रहा और ऐसे में चुनावी योद्धाओं के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
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