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Kurukshetra News: 36 घंटे बाद भी राक्षी नदी की टूटी पटरी जस की तस, पीड़ित परिवारों को नहीं मिली कोई मदद
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लाडवा। राक्षी नदी की टूटी पटरी को 36 घंटे से ज्यादा समय हो गया जहां से पानी का बहाव लगातार जारी है। प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद न तो पटरी का टूटा हिस्सा ठीक हुआ और न हीं पानी का बहाव देर शाम तक कम हो सका। जिससे आसपास के लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।
वही बेघर हुए भीमा के परिवार को 36 घंटे बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई भी मदद नहीं मिली है। कुलदीप, बीमा तथा पूजा आदि ने बताया कि उनका परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का जीवन-यापन करता है। नदी का तटबंध टूटने से उनका घर पूरी तरह पानी में डूब गया है जिससे घर के ढहने का भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि घर में रखा सारा सामान खराब हो गया है। इतना ही नहीं पशुओं के लिए रखा सूखा चारा भी पानी की भेंट चढ़ गया जिससे पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है।
24 घंटे रहे भूखे, फिर पड़ोस से लिया गैस सिलिंडर
पीड़ित परिवार की महिला पूजा ने बताया कि नदी के अचानक टूटने से उनको अपनी जान के लाले पड़ गए थे। जल्दबाजी में खाने-पीने के साथ घर में रखा सिलिंडर भी घर के अंदर पानी में ही फंस गया। छोटे बच्चों के भूख के मारे बिलखने से दूरदराज पड़ोस से सिलिंडर उधार लेकर आए। पीड़ित परिवार ने बताया कि न तो उनके पास खाने की चीजें बची थी और न ही कोई अन्य साधन। नदी के टूटने के बाद कुछ नेता व अधिकारी आए जरूर थे लेकिन फोटो खिंचवा कर चले गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से खाने-पीने व अन्य कोई मदद उन्हें नहीं मिली।
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वही बेघर हुए भीमा के परिवार को 36 घंटे बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई भी मदद नहीं मिली है। कुलदीप, बीमा तथा पूजा आदि ने बताया कि उनका परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का जीवन-यापन करता है। नदी का तटबंध टूटने से उनका घर पूरी तरह पानी में डूब गया है जिससे घर के ढहने का भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि घर में रखा सारा सामान खराब हो गया है। इतना ही नहीं पशुओं के लिए रखा सूखा चारा भी पानी की भेंट चढ़ गया जिससे पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है।
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24 घंटे रहे भूखे, फिर पड़ोस से लिया गैस सिलिंडर
पीड़ित परिवार की महिला पूजा ने बताया कि नदी के अचानक टूटने से उनको अपनी जान के लाले पड़ गए थे। जल्दबाजी में खाने-पीने के साथ घर में रखा सिलिंडर भी घर के अंदर पानी में ही फंस गया। छोटे बच्चों के भूख के मारे बिलखने से दूरदराज पड़ोस से सिलिंडर उधार लेकर आए। पीड़ित परिवार ने बताया कि न तो उनके पास खाने की चीजें बची थी और न ही कोई अन्य साधन। नदी के टूटने के बाद कुछ नेता व अधिकारी आए जरूर थे लेकिन फोटो खिंचवा कर चले गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से खाने-पीने व अन्य कोई मदद उन्हें नहीं मिली।
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