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Kurukshetra News: गुजरात और राजस्थान में सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के गठन की कवायद
Fri, 05 Jan 2024 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 05 Jan 2024 02:20 AM IST
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कुरुक्षेत्र। अब राजस्थान व गुजरात में भी पवित्र सरस्वती नदी को फिर से जीवंत करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। जहां हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड इन राज्यों में सरस्वती की खोज में जुटा है वहीं यहां भी हरियाणा की तर्ज पर सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड बनाए जाने के लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा जाएगा। ये पहल भी फिलहाल हरियाणा बोर्ड की ओर से की जा रही है। बोर्ड न केवल दोनों राज्यों की सरकारों से संपर्क साध रहा है बल्कि प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजे जाने की तैयारी में जुटा है। बोर्ड की एक टीम जल्द ही इस मामले में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी मुलाकात करेगी। यह प्रपोजल भी दोनों प्रदेशों के इसरो से जुड़े वैज्ञानिकों से मिलकर ही तैयार किया जाएगा।
इस संबंध में इसरो के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर जेआर शर्मा एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महावीर पूनिया से हरियाणा बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच व अन्य अधिकारियों की प्राथमिक तौर पर हुई बैठक में गंभीरता से चर्चा हो चुकी है। इन वैज्ञानिकों ने इसरो की ओर से स्थापित सेटेलाइट की ओर से सरस्वती नदी को लेकर भेजी गई तस्वीरों पर गहन मंथन किया है। जानकारी के अनुसार हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह के नेतृत्व में तकनीकी अधिकारियों की एक टीम 23 दिसंबर को गुजरात और राजस्थान में सरस्वती पर शोध करने के लिए पहुंची थी। एक सप्ताह के दौरान टीम ने सात से आठ जगहों पर रेत, पत्थर व पानी के सैंपल लिए, जिन्हें देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन ज्योलॉजी में भेजा जाएगा। यहां हरियाणा में बह रही सरस्वती से संबंधित रेत, पत्थर व पानी के सैंपल से इनका मिलान किया जाएगा। इससे तकनीकी तौर पर दोनों राज्यों में पूर्व में बहती रही सरस्वती नदी की पुष्टि हो सकेगी। दोनों राज्यों में सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड स्थापित किए जाने को लेकर तैयार किए जाने वाले प्रपोजल में इसे भी आधार बनाया जाएगा।
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जयपुर में स्थापित किया जाएगा शोध केंद्र
धुम्मन सिंह के मुताबिक लूनी नदी राजस्थान से होकर गुजरात के रन ऑफ कच्छ में गिरती है उसके ऊपर भी शोध कार्य शुरू किया जा रहा है और इसके लिए जयपुर या फिर जोधपुर में शोध केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। माना जाता है कि लूनी नदी भी सरस्वती नदी की ही शाखा है। इस बार बारिश के सीजन में सरस्वती का पानी सिरसा ओ टू हैड से होते हुए राजस्थान में गया था इसी सतह को सरस्वती बोर्ड की टीम ने जांचा और पाया कि वह सरस्वती का जो प्राकृतिक बहाव है और राजस्थान से होकर ही गुजरात में जाता है।
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पुष्कर व सिद्धपुर जैसी तीर्थ सरस्वती किनारे पर ही : धुम्मन
हरियाणा राज्य सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच बताते हैं कि पिंडदान पवित्र नदी गंगा व सरस्वती किनारे ही होते हैं। जहां गंगा किनारे हरिद्वार में पिंडदान किया जाता है वहीं हरियाणा में सरस्वती तट पर पिहोवा में तीर्थ स्थित है, जहां विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचते हैं। राजस्थान के पुष्कर व गुजरात के सिद्धपुर में भी तीर्थ सरस्वती तट पर ही स्थित है, जो वहां पहले सरस्वती बहने के प्रमाण हैं। दोनों राज्यों में दौरे के दौरान रेत, पत्थर व पानी भी हरियाणा में सरस्वती की तर्ज पर ही मिला है। इसकी लैब जांच से तकनीकी पुष्टि कराई जाएगी। इसरो के वैज्ञानिक भी सेटेलाइट से भेजी तस्वीरों को भी पुख्ता प्रमाण माना जा सकता है और यह सब मिलाकर ही प्रपोजल तैयार किया जा रहा है। इन दोनों राज्यों में भी हरियाणा की तरह धरोहर विकास बोर्ड बनाए जाने की आवश्यकता है, जिसके लिए यह प्रपोजल जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
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इस संबंध में इसरो के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर जेआर शर्मा एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महावीर पूनिया से हरियाणा बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच व अन्य अधिकारियों की प्राथमिक तौर पर हुई बैठक में गंभीरता से चर्चा हो चुकी है। इन वैज्ञानिकों ने इसरो की ओर से स्थापित सेटेलाइट की ओर से सरस्वती नदी को लेकर भेजी गई तस्वीरों पर गहन मंथन किया है। जानकारी के अनुसार हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह के नेतृत्व में तकनीकी अधिकारियों की एक टीम 23 दिसंबर को गुजरात और राजस्थान में सरस्वती पर शोध करने के लिए पहुंची थी। एक सप्ताह के दौरान टीम ने सात से आठ जगहों पर रेत, पत्थर व पानी के सैंपल लिए, जिन्हें देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन ज्योलॉजी में भेजा जाएगा। यहां हरियाणा में बह रही सरस्वती से संबंधित रेत, पत्थर व पानी के सैंपल से इनका मिलान किया जाएगा। इससे तकनीकी तौर पर दोनों राज्यों में पूर्व में बहती रही सरस्वती नदी की पुष्टि हो सकेगी। दोनों राज्यों में सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड स्थापित किए जाने को लेकर तैयार किए जाने वाले प्रपोजल में इसे भी आधार बनाया जाएगा।
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जयपुर में स्थापित किया जाएगा शोध केंद्र
धुम्मन सिंह के मुताबिक लूनी नदी राजस्थान से होकर गुजरात के रन ऑफ कच्छ में गिरती है उसके ऊपर भी शोध कार्य शुरू किया जा रहा है और इसके लिए जयपुर या फिर जोधपुर में शोध केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। माना जाता है कि लूनी नदी भी सरस्वती नदी की ही शाखा है। इस बार बारिश के सीजन में सरस्वती का पानी सिरसा ओ टू हैड से होते हुए राजस्थान में गया था इसी सतह को सरस्वती बोर्ड की टीम ने जांचा और पाया कि वह सरस्वती का जो प्राकृतिक बहाव है और राजस्थान से होकर ही गुजरात में जाता है।
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पुष्कर व सिद्धपुर जैसी तीर्थ सरस्वती किनारे पर ही : धुम्मन
हरियाणा राज्य सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच बताते हैं कि पिंडदान पवित्र नदी गंगा व सरस्वती किनारे ही होते हैं। जहां गंगा किनारे हरिद्वार में पिंडदान किया जाता है वहीं हरियाणा में सरस्वती तट पर पिहोवा में तीर्थ स्थित है, जहां विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचते हैं। राजस्थान के पुष्कर व गुजरात के सिद्धपुर में भी तीर्थ सरस्वती तट पर ही स्थित है, जो वहां पहले सरस्वती बहने के प्रमाण हैं। दोनों राज्यों में दौरे के दौरान रेत, पत्थर व पानी भी हरियाणा में सरस्वती की तर्ज पर ही मिला है। इसकी लैब जांच से तकनीकी पुष्टि कराई जाएगी। इसरो के वैज्ञानिक भी सेटेलाइट से भेजी तस्वीरों को भी पुख्ता प्रमाण माना जा सकता है और यह सब मिलाकर ही प्रपोजल तैयार किया जा रहा है। इन दोनों राज्यों में भी हरियाणा की तरह धरोहर विकास बोर्ड बनाए जाने की आवश्यकता है, जिसके लिए यह प्रपोजल जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।