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Kurukshetra News: दाखिले के समय स्क्रीनिंग टेस्ट लेने वाले स्कूलों पर शिक्षा विभाग कसेगा शिकंजा
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कुरुक्षेत्र। अब सरकारी व निजी स्कूलों में दाखिले के समय स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं लिया जा सकेगा। अगर किसी भी स्कूल के खिलाफ कोई शिकायत मिलती है तो उस पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। इसको लेकर शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी कर आदेश दिए हैं। पत्र के मुताबिक आदेश दिए गए हैं कि जो स्कूल दाखिले के समय स्क्रीनिंग टेस्ट लेते हैं वह शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 13 की अवहेलना है लेकिन आदेशों को सरासर नकारा जाता है और निजी स्कूलों में दाखिले के लिए अभिभावकों और बच्चों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है तो वहीं कई बार मनपसंद स्कूल में दाखिला लेने का सपना भी अधूरा रह जाता है। क्योंकि इस टेस्ट को कई बार विद्यार्थी पूरी तरह से पास नहीं कर पाता, जिसके बाद उसे स्कूल में दाखिला मिलना असंभव हो जाता है।
जिले के कई निजी और संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों में दाखिले के दौरान टेस्ट लिया जा रहा है और टेस्ट पास होने पर ही वह तय किया जाता है कि विद्यार्थी किस स्टैंडर्ड में पढ़ने के काबिल है। जोकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 13 की अवहेलना है, जिसकी ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। कई बार सरकारी स्कूल से विद्यार्थी निजी स्कूल में दाखिला लेता है तो उन्हें एक कक्षा पीछे ही दाखिला दिया जाता है, वहीं कई बार बोर्ड की परीक्षा में दाखिला देने के लिए साफ मना ही कर दिया जाता है। क्योंकि निजी स्कूलों को अपने परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रखने की होड़ लगी रहती है, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को एक साल फिर से पिछली कक्षा में ही दाखिला लेना पढ़ता है। जहां तक नर्सरी में बच्चे के दाखिला के लिए भी ओरल टेस्ट लिए जा रहे हैं। उल्लेख है कि शिक्षा विभाग को शिकायतें मिल रही थी कि स्कूलों में बच्चों का स्क्रीनिंग टेस्ट लिए जाने के बाद ही दाखिला दिया जाता है।
नियमों की अवहेलना की तो की जाएगी कार्रवाई : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी रोहतास वर्मा का कहना है कि किसी भी विद्यालय में दाखिले कि लिए स्क्रीनिंग टेस्ट न लिए जाएं, इसको लेकर विभाग ने पत्र जारी किया है। यह पत्र बीईओ को भेज दिया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 13 का सख्ती से पालन कराया जाए। अगर कोई नियमों की अवहेलना करता पाया जाता है तो जारी किए गए आदेशों के मुताबिक जुर्माना लगाया जाएगा। उनका कहना है कि स्कूलों द्वारा लिए जा रहे टेस्ट का कोई भी मामला उनके संज्ञान में नही है।
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स्कूल के स्टैंडर्ड अनुसार लिया जाता है टेस्ट : राजीव चावला
निजी स्कूल शिक्षा संघ के प्रधान राजीव चावला का कहना है कि स्कूल के स्टैंडर्ड के हिसाब से बच्चों का आकलन के लिए लिया जाता है। निदेशालय द्वारा जारी किए गए पत्र के मुताबिक स्टैंडर्ड के अनुसार बच्चों का आकलन नहीं हो पाएगा। सरकारी स्कूल से विद्यार्थी कई बार जब निजी स्कूल में दाखिला लेता है तो बच्चे का कक्षा के हिसाब से टेस्ट द्वारा आकलन किया जाता है। इससे बच्चे का स्टैंडर्ड का भी पता लग जाता है कि बच्चा स्कूल द्वारा कराई जा रही शिक्षा के अनुसार टिक पाएगा या नहीं, वहीं जब 11वीं कक्षा में विद्यार्थी दाखिला लेता है तो विद्यार्थी द्वारा चयनित स्ट्रीम को लेकर भी टेस्ट प्रक्रिया अमल में लाई जाती है।
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जिले के कई निजी और संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों में दाखिले के दौरान टेस्ट लिया जा रहा है और टेस्ट पास होने पर ही वह तय किया जाता है कि विद्यार्थी किस स्टैंडर्ड में पढ़ने के काबिल है। जोकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 13 की अवहेलना है, जिसकी ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। कई बार सरकारी स्कूल से विद्यार्थी निजी स्कूल में दाखिला लेता है तो उन्हें एक कक्षा पीछे ही दाखिला दिया जाता है, वहीं कई बार बोर्ड की परीक्षा में दाखिला देने के लिए साफ मना ही कर दिया जाता है। क्योंकि निजी स्कूलों को अपने परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रखने की होड़ लगी रहती है, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को एक साल फिर से पिछली कक्षा में ही दाखिला लेना पढ़ता है। जहां तक नर्सरी में बच्चे के दाखिला के लिए भी ओरल टेस्ट लिए जा रहे हैं। उल्लेख है कि शिक्षा विभाग को शिकायतें मिल रही थी कि स्कूलों में बच्चों का स्क्रीनिंग टेस्ट लिए जाने के बाद ही दाखिला दिया जाता है।
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नियमों की अवहेलना की तो की जाएगी कार्रवाई : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी रोहतास वर्मा का कहना है कि किसी भी विद्यालय में दाखिले कि लिए स्क्रीनिंग टेस्ट न लिए जाएं, इसको लेकर विभाग ने पत्र जारी किया है। यह पत्र बीईओ को भेज दिया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 13 का सख्ती से पालन कराया जाए। अगर कोई नियमों की अवहेलना करता पाया जाता है तो जारी किए गए आदेशों के मुताबिक जुर्माना लगाया जाएगा। उनका कहना है कि स्कूलों द्वारा लिए जा रहे टेस्ट का कोई भी मामला उनके संज्ञान में नही है।
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स्कूल के स्टैंडर्ड अनुसार लिया जाता है टेस्ट : राजीव चावला
निजी स्कूल शिक्षा संघ के प्रधान राजीव चावला का कहना है कि स्कूल के स्टैंडर्ड के हिसाब से बच्चों का आकलन के लिए लिया जाता है। निदेशालय द्वारा जारी किए गए पत्र के मुताबिक स्टैंडर्ड के अनुसार बच्चों का आकलन नहीं हो पाएगा। सरकारी स्कूल से विद्यार्थी कई बार जब निजी स्कूल में दाखिला लेता है तो बच्चे का कक्षा के हिसाब से टेस्ट द्वारा आकलन किया जाता है। इससे बच्चे का स्टैंडर्ड का भी पता लग जाता है कि बच्चा स्कूल द्वारा कराई जा रही शिक्षा के अनुसार टिक पाएगा या नहीं, वहीं जब 11वीं कक्षा में विद्यार्थी दाखिला लेता है तो विद्यार्थी द्वारा चयनित स्ट्रीम को लेकर भी टेस्ट प्रक्रिया अमल में लाई जाती है।