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Kurukshetra News: डाॅ. शाश्वतानंद गिरि ने भाजपा से मांगा टिकट
Fri, 23 Feb 2024 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 23 Feb 2024 02:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। धर्म एवं राजनीति अलग नहीं है। भारतवर्ष का इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब विपत्ति आई है और समाज पथभ्रष्ट हुआ है तो संत महापुरुषों ने ही मार्गदर्शन किया है। यह कहना है शाश्वतानंद धाम श्री अखंड गीता पीठ के महामंडलेश्वर डाॅ. शाश्वतानंद गिरि का। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कुरुक्षेत्र सीट से भाजपा की टिकट के लिए दावेदारी पेश की है।
जारी बयान में डाॅ. गिरि ने कहा कि अगर वास्तव कुरुक्षेत्र के तीर्थों का देश के अन्य तीर्थों की भांति विकास और सम्मान चाहिए तो संत महापुरुषों को राजनीति में आगे आना होगा। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में विशेषकर कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर संतों की भूमिका और स्वयं के राजनीति में आने बारे भी स्थिति बिलकुल स्पष्ट कर दी है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से उत्पन्न गीता की जन्मस्थली है तथा गीता मानव जीवन का मार्गदर्शन करती है। मनुष्य के सफल जीवन का जीवन दर्शन गीता में है। उन्होंने बताया कि तीन तरह के संन्यासी होते हैं। कुछ केवल वेश धारण संन्यासी हैं, कुछ आत्मजीवी हैं जो केवल अपने में मस्त रहते हैं तथा ईश्वर की भक्ति में मस्त रहते हैं। उन्होंने बताया कि तीसरे प्रकार के संन्यासी लोकजीवी होते हैं।
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उन्होंने कहा कि लोकजीवी संन्यासी द्वारा ब्रह्म दर्शन करने के उपरांत पूरा विश्व ही परमात्मा का स्वरूप है। ऐसी स्थिति में लोकजीवी संन्यासीके लिए अपने पराए का कोई भेद नहीं है। ऐसा संन्यासी सभी के लिए जीवन जीता है। उसकी योग्यता, अनुभव एवं शरीर सब कुछ सर्वहित के लिए समर्पित है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में सर्वकल्याण की बात कही है। राजनीति भी लोकमंगल एवं सर्व कल्याण की दिशा में सशक्त माध्यम है जिसके माध्यम से हम समाज की सेवा एवं हित कर सकते हैं।
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कुरुक्षेत्र। धर्म एवं राजनीति अलग नहीं है। भारतवर्ष का इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब विपत्ति आई है और समाज पथभ्रष्ट हुआ है तो संत महापुरुषों ने ही मार्गदर्शन किया है। यह कहना है शाश्वतानंद धाम श्री अखंड गीता पीठ के महामंडलेश्वर डाॅ. शाश्वतानंद गिरि का। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कुरुक्षेत्र सीट से भाजपा की टिकट के लिए दावेदारी पेश की है।
जारी बयान में डाॅ. गिरि ने कहा कि अगर वास्तव कुरुक्षेत्र के तीर्थों का देश के अन्य तीर्थों की भांति विकास और सम्मान चाहिए तो संत महापुरुषों को राजनीति में आगे आना होगा। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में विशेषकर कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर संतों की भूमिका और स्वयं के राजनीति में आने बारे भी स्थिति बिलकुल स्पष्ट कर दी है।
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उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से उत्पन्न गीता की जन्मस्थली है तथा गीता मानव जीवन का मार्गदर्शन करती है। मनुष्य के सफल जीवन का जीवन दर्शन गीता में है। उन्होंने बताया कि तीन तरह के संन्यासी होते हैं। कुछ केवल वेश धारण संन्यासी हैं, कुछ आत्मजीवी हैं जो केवल अपने में मस्त रहते हैं तथा ईश्वर की भक्ति में मस्त रहते हैं। उन्होंने बताया कि तीसरे प्रकार के संन्यासी लोकजीवी होते हैं।
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उन्होंने कहा कि लोकजीवी संन्यासी द्वारा ब्रह्म दर्शन करने के उपरांत पूरा विश्व ही परमात्मा का स्वरूप है। ऐसी स्थिति में लोकजीवी संन्यासीके लिए अपने पराए का कोई भेद नहीं है। ऐसा संन्यासी सभी के लिए जीवन जीता है। उसकी योग्यता, अनुभव एवं शरीर सब कुछ सर्वहित के लिए समर्पित है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में सर्वकल्याण की बात कही है। राजनीति भी लोकमंगल एवं सर्व कल्याण की दिशा में सशक्त माध्यम है जिसके माध्यम से हम समाज की सेवा एवं हित कर सकते हैं।