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कोरोना वायरसः लॉकडाउन में कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना को सौंपी गई कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कमान

Wed, 01 Apr 2020 04:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 01 Apr 2020 04:45 PM IST
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Dr. Neeta Khanna is new chancellor of Kurukshetra University
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो
चार साल तक विद्यार्थियों एवं गैर शिक्षक कर्मचारियों को प्रशासनिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाले कुलपति प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा का कार्यकाल समाप्त हो गया। मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल सत्यादेव नारायण आर्य के आदेशानुसार विश्वविद्यालय की कमान केयू कुलसचिव डा. नीता खन्ना को सौंपी गई। आगामी आदेशों तक कुलसचिव डा. नीता खन्ना कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगी। जिसके बाद विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में पिछले कई दिनों से शिक्षकों एवं गैर शिक्षक कर्मचारियों के बीच कुलपति को लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए तीन माह की एक्सटेंशन दी जाने की चर्चाएं जोरों पर थी, लेकिन मंगलवार को हरियाणा राजभवन से जारी हुए आदेश में कुलसचिव डा. नीता खन्ना को कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। बताया जा रहा है कि कुलपति को कार्य विस्तार न मिले इसके लिए जबरदस्त लॉबिंग चल रही थी।
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एबीवीपी की जिला कार्यकारिणी सहित कई राजनेताओं के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। मालूम हो कि हाल ही में रैली का न्यौता देने कुरुक्षेत्र पहुंचे इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के समक्ष भी कुंटिया नेताओं ने अपनी समस्याओं को लेकर दुखड़ा रोया था।
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चर्चा में बने रहे प्रो. शर्मा
प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा ने चार वर्ष पहले 31 मार्च 2016 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बतौर कुलपति का कार्यभार संभाला था। गत वर्ष 31 मार्च 2019 को कुलपति प्रो. केसी शर्मा को एक साल का सेवा विस्तार मिल। 31 मार्च 2016 से अब तक उनके कार्य करने के तौर-तरीके चर्चा का विषय रहे।

विश्वविद्यालयों को ऊंचाइयों पर ले जाने पर कुलपति की महत्वपूर्ण भूमिका रही तो वहीं चार वर्ष तक केयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों के साथ भी पेंच फंसा रहा। हालांकि कुंटिया का ज्यादातर कुलपतियों पर दबाव रहा, लेकिन प्रो. केसी शर्मा ने हड़ताली गैर शिक्षक कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया।

डॉ. केसी शर्मा के कार्यकाल में ये रही केयू की उपलब्धियां

चार वर्ष बाद उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा 30 अक्तूबर 2017 को विश्वविद्यालय को ए प्लस ग्रेड का दर्जा मिला। जिसकी वैधता 29 अक्तूबर 2022 तक है। इसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देशभर के स्वच्छता प्राप्त विश्वविद्यालयों की सूची में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने 8वां स्थान हासिल किया। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क के तहत केयू को 95वां रैंक मिला। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत केयू को 100 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली। जिसके तहत विश्वविद्यालय परिसर में तीन फरवरी 2019 को 5 रिसर्च केंद्र का डिजीटल उद्घाटन किया गया।

इसके अलावा कुलपति प्रो. केसी शर्मा की विश्वविद्यालय का डिजीटलीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विश्वविद्यालय का डिजीटलीकरण होने से परीक्षा परिणाम जल्द घोषित होने लगे तो वहीं विद्यार्थी भी आनलाइन फीस भरने और पूर्न मूल्यांकन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके साथ ही कुलपति ने लंबे समय से अटके पड़े दीक्षांत समारोह को भी गति दी थी। अब प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। इन्हीं के कार्यकाल के दौरान 22 वर्ष बाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव सफलतापूर्वक हो सका।

हड़ताली कर्मियों का काटा वेतन तो दो-दो घंटे अतिरिक्त कार्य भी कराया
यूनिवर्सिटी गैर शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर वर्ष 2018 में 4 से 28 मार्च तक दो-दो घंटे की हड़ताल की गई। इसी आधार पर कुलपति ने हड़ताली कर्मचारियों के वेतन काटने के आदेश दिए तो वहीं कर्मचारियों से 2-2 घंटे तक अतिरिक्त कार्य भी कराया। इसके बाद कुंटिया ने 29 अगस्त से 19 सितंबर तक अनिश्चितकालीन हड़ताल की, जिस पर कुलपति प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कड़ा रुख अपने हुए कर्मियों के 22 दिन का अर्जित अवकाश काटा। वहीं करीब 37 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कोर्ट केस भी किया था।

पहली बार एक साथ 19 विद्यार्थियों को किया निष्कासित
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास में 18 मार्च 2019 को यह पहली बार हुआ था कि प्रदर्शन के दौरान हंगामा और सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प के आरोप में एकसाथ 19 विद्यार्थियों को निष्कासित किया गया हो। इनमें से कुछ विद्यार्थी अभी भी निष्कासित हैं। यही नहीं, एबीवीपी के कई छात्र नेता भी कुलपति ने निष्कासित किए हुए हैं।
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