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Kurukshetra News: अमेरिकी जर्नल में शामिल हुआ डॉ. जितेंद्र का शोध
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के शिक्षक डॉ. जितेंद्र भारद्वाज की ओर से कैडमियम के स्वास्थ्य पर होने वाले हानिकारक प्रभावों पर किया गया शोध अमेरिकी जर्नल के शीर्ष 10 सर्वाधिक उद्धृत लेखों में शामिल किया गया है।
डॉ. जितेंद्र की इस उपलब्धि को लेकर विवि परिसर में खुशी का माहौल है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया है। डॉ़ जितेंद्र के 70 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं और आठ पेटेंट प्राप्त हुए हैं। वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।
कैडमियम आमतौर पर औद्योगिक, सिगरेट के धुएं, दूषित भोजन, पानी और कुछ उर्वरकों और कीटनाशकों में पाया जाता है। यह समय के साथ शरीर में जमा हो सकता है। खासकर गुर्दे और यकृत में, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कैडमियम विषाक्तता तब होती है जब शरीर अत्यधिक मात्रा में कैडमियम के संपर्क में आता है, जो एक भारी धातु है जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गुणवत्ता एवं उत्कृष्ट शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय द्वारा शोधकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन, उत्कृष्ट योगदान की मान्यता, सुव्यवस्थित परियोजना अनुमोदन, पेटेंट-फाइलिंग समर्थन और इनक्यूबेशन, स्टार्टअप और नवाचार केंद्रों की स्थापना की गई है। विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता भटनागर ने डॉ. जितेंद्र भारद्वाज को इस उपलब्धि बधाई दी।
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डॉ. जितेंद्र की इस उपलब्धि को लेकर विवि परिसर में खुशी का माहौल है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया है। डॉ़ जितेंद्र के 70 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं और आठ पेटेंट प्राप्त हुए हैं। वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।
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कैडमियम आमतौर पर औद्योगिक, सिगरेट के धुएं, दूषित भोजन, पानी और कुछ उर्वरकों और कीटनाशकों में पाया जाता है। यह समय के साथ शरीर में जमा हो सकता है। खासकर गुर्दे और यकृत में, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कैडमियम विषाक्तता तब होती है जब शरीर अत्यधिक मात्रा में कैडमियम के संपर्क में आता है, जो एक भारी धातु है जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गुणवत्ता एवं उत्कृष्ट शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय द्वारा शोधकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन, उत्कृष्ट योगदान की मान्यता, सुव्यवस्थित परियोजना अनुमोदन, पेटेंट-फाइलिंग समर्थन और इनक्यूबेशन, स्टार्टअप और नवाचार केंद्रों की स्थापना की गई है। विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता भटनागर ने डॉ. जितेंद्र भारद्वाज को इस उपलब्धि बधाई दी।
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