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बीमार होना तो रात में सीएचसी न जाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 01:51 AM IST
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Do not go to CHC at night if you are sick
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बारना में रात के समय मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह रात के समय डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ का ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहता है। रात में सीएचसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हवाले रहती है। यहां रविवार को रात में पहुंचे मरीज को इलाज न मिलने पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस मरीज को समझा-बुझाकर जिला अस्पताल ले गई।
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दरअसल बारना निवासी रामचंद्र रविवार की रात अपने 20 वर्षीय बीमार पुत्र रवि कुमार को इलाज के लिए सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां कोई भी डॉक्टर व नर्स मौजूद नहीं थे। रामचंद्र ने एसएमओ को भी फोन किया। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। इस पर रामचंद्र ने परिजनों के साथ हंगामा किया और डायल 112 पर कॉल की। कुछ ही देर में डायल 112 की गाड़ी मौके पर पहुंची। पुलिस कर्मियों ने समझा-बुझाकर रवि कुमार को अपनी गाड़ी में बैठाकर एलएनजेपी जिला अस्पताल छोड़ा।
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उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बारना की इमारत का निर्माण किया गया था। इससे पहले पुरानी इमारत में पीएचसी चल रही थी। इस सीएचसी के अंतर्गत अमीन, धुराला व किरमिच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के 67 गांव आते हैं। इन गांवों से आए दिन डिलीवरी केस भी आते हैं, जिन्हें यहां मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ओर से जिला अस्पताल में भेज दिया जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निवर्तमान सरपंच शिवकुमार ने मांग करते हुए कहा कि रात समय भी सीएचसी में ग्रामीणों को सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
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स्टाफ नर्सों ने सात मार्च को पत्र सीएमओ को लिखा था। पत्र में लिखा था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन वर्ष पहले 24 घंटे की इमरजेंसी सुविधा शुरू करने के बावजूद यहां रात को चिकित्सा अधिकारी की ड्यूटी नहीं लगाई गई है, जिसके चलते डिलीवरी केस, रोड एक्सीडेंट जैसे मामलों में रात को सुविधा नहीं दी जा सकती। कोई कार्रवाई न होने से 19 मई के बाद नर्सिंग स्टाफ ने भी रात को ड्यूटी करना छोड़ दिया। इसके बाद यहां एिंबुलेंस ड्राइवर व अन्य चतुर्थ श्रेणी स्टाफ ही रहता है।
एसएमओ डॉ. अंजू ने बताया कि सीएचसी में डॉक्टर पूरे हैं, लेकिन स्टाफ नर्स कम हैं। इसके चलते रात को ड्यूटी नहीं लगा पाती हैं। इस बारे में उन्होंने विभाग को पत्र लिखे हैं। इसके बाद भी स्टाफ नर्सों की कमी है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एसएमओ सहित कुल 7 डॉक्टर हैं जिसमें से एक लीव पर हैं। एक डॉक्टर को डेपुटेशन पर अन्य स्थान पर भेजा गया है। वहीं सीएचसी के अंतर्गत आने वाली तीन पीएचसी में 6 डॉक्टर हैं।
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