{"_id":"69b4722d79eeda81c20951a6","slug":"diesel-furnace-being-prepared-for-thousands-of-rupees-kurukshetra-news-c-45-1-kur1010-151487-2026-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: हजारों रुपये में तैयार कराई जा रही डीजल की भट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: हजारों रुपये में तैयार कराई जा रही डीजल की भट्टी
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। किरमिच रोड पर स्थित एक होटल में डीजल भट्टी पर तैयार की जा रही सब्जी । संवाद
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में व्यावसायिक गैस की किल्लत का असर अब शहर के भोजनालयों और छोटे रेहड़ी-पटरी वालों पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर में लगभग 150 से अधिक छोटे-बड़े भोजनालय संचालित हो रहे हैं जिनका अधिकतर कारोबार बाहर से आने वाले यात्रियों पर निर्भर है। गैस की कमी के कारण इन भोजनालय संचालकों के सामने अब कामकाज चलाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में ये संचालक भट्टियों की ओर रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा डीजल की भट्टियां 30-30 हजार रुपये में तैयार कराई जा रही हैं। एनआईटी के सामने चल रहे भोजनालयों के संचालकों ने कहा कि गैस की किल्लत से उनका कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। हालत ये हैं कि ब्लैक में भी गैस सिलिंडर दो हजार रुपये में मिल रहा है। धर्मनगरी में अकेले ब्रह्मसरोवर से बिरला मंदिर तक करीब 80 भोजनालय हैं, जहां बाहर से आए यात्री भोजन करते हैं।
ढाबा चलाने वाले दीपक शांडिल्य ने बताया कि बड़े भोजनालय किसी तरह काम चला सकते हैं लेकिन रेहड़ी-पटरी और छोटी टपरियों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन दो से तीन सिलिंडर की खपत होती है लेकिन अब गैस की कमी से काफी दिक्कत आ रही है।
विज्ञापन
तीन गुना बढ़ा खर्च : एक अन्य होटल संचालक ने बताया कि इन भट्टियों को चलाने के लिए करीब 25 हजार रुपये का डीजल मंगवाया गया है, ताकि भोजन और मिठाइयों का काम प्रभावित न हो।
30-30 हजार में बनवाई स्पेशल भट्टियां
एनआईटी के सामने चल रहे साहिल स्वीट्स के मालिक साहिल ने बताया कि उनके पास केवल एक दिन का ही गैस सिलिंडर शेष है। इस स्थिति का अंदेशा होने के कारण उन्होंने पहले ही 30-30 हजार रुपये खर्च कर चार विशेष भट्टियां तैयार करवाई हैं। दूध गर्म करने, भोजन पकाने, समोसे और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने के लिए अलग-अलग भट्टियां बनवाई गई हैं, जो पूरी तरह डीजल पर चलेंगी। इसके लिए डीजल का भी अलग से इंतजाम किया गया है।
विज्ञापन
इसके अलावा डीजल की भट्टियां 30-30 हजार रुपये में तैयार कराई जा रही हैं। एनआईटी के सामने चल रहे भोजनालयों के संचालकों ने कहा कि गैस की किल्लत से उनका कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। हालत ये हैं कि ब्लैक में भी गैस सिलिंडर दो हजार रुपये में मिल रहा है। धर्मनगरी में अकेले ब्रह्मसरोवर से बिरला मंदिर तक करीब 80 भोजनालय हैं, जहां बाहर से आए यात्री भोजन करते हैं।
विज्ञापन
ढाबा चलाने वाले दीपक शांडिल्य ने बताया कि बड़े भोजनालय किसी तरह काम चला सकते हैं लेकिन रेहड़ी-पटरी और छोटी टपरियों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन दो से तीन सिलिंडर की खपत होती है लेकिन अब गैस की कमी से काफी दिक्कत आ रही है।
विज्ञापन
तीन गुना बढ़ा खर्च : एक अन्य होटल संचालक ने बताया कि इन भट्टियों को चलाने के लिए करीब 25 हजार रुपये का डीजल मंगवाया गया है, ताकि भोजन और मिठाइयों का काम प्रभावित न हो।
30-30 हजार में बनवाई स्पेशल भट्टियां
एनआईटी के सामने चल रहे साहिल स्वीट्स के मालिक साहिल ने बताया कि उनके पास केवल एक दिन का ही गैस सिलिंडर शेष है। इस स्थिति का अंदेशा होने के कारण उन्होंने पहले ही 30-30 हजार रुपये खर्च कर चार विशेष भट्टियां तैयार करवाई हैं। दूध गर्म करने, भोजन पकाने, समोसे और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने के लिए अलग-अलग भट्टियां बनवाई गई हैं, जो पूरी तरह डीजल पर चलेंगी। इसके लिए डीजल का भी अलग से इंतजाम किया गया है।

कुरुक्षेत्र। किरमिच रोड पर स्थित एक होटल में डीजल भट्टी पर तैयार की जा रही सब्जी । संवाद

कुरुक्षेत्र। किरमिच रोड पर स्थित एक होटल में डीजल भट्टी पर तैयार की जा रही सब्जी । संवाद

कुरुक्षेत्र। किरमिच रोड पर स्थित एक होटल में डीजल भट्टी पर तैयार की जा रही सब्जी । संवाद