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Kurukshetra News: ज्येष्ठ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने लगाई ब्रह्मसरोवर में डुबकी
Fri, 07 Jun 2024 04:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 07 Jun 2024 04:51 AM IST
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कुरुक्षेत्र। ज्येष्ठ अमावस्या पर वीरवार को अल सुबह ही तीर्थों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने स्नान किया और पितरों की शांति के लिए दान भी किया। जिले भर के तीर्थ स्थलों पर हजारों श्रद्धालु अल सुबह से ही पहुंचने शुरू हो गए थे। ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने वीरवार को दान कर पूजा अर्चना की। ज्येष्ठ अमावस्या के चलते सभी तीर्थों पर दिनभर मेले जैसा माहौल देखने को मिला।
इस दौरान केडीबी प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर बंदोबस्त भी किए गए थे। पुलिस प्रशासन के कई अधिकारी भी पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर मौजूद रहे। जबकि केडीबी की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए बार-बार अनाउंसमेंट की जा रही थी। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि देव जयंती भी मनाई जाती हैं, इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व अधिक हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार न्याय के देवता शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हुआ था। इस दिन शनि देव की पूजा अर्चना करने का विशेष फल श्रद्धालुओं को मिलता है। वहीं ज्येष्ठ अमावस्या के चलते कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से शहर के कई स्थानों पर हवन किए गए और भंडारे भी लगाए गए। जबकि शनि देव जयंती के चलते शनि देव के मंदिरों में भी रौनक बनी रही। श्रद्धालुओं ने शनि मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की।
बॉक्स
अमावस्या पर दान करने से पितर होते हैं प्रसन्न : प्रेम कुमार
पंडित प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था, जिसके चलते ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती मनाई जाती हैं। इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान करने के बाद दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही न्याय के देवता शनिदेव की पूजा अर्चना करने का भी महत्व है। इसके अलावा महिलाएं भी इस दिन वट सावित्री का व्रत भी रखती हैं।
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इस दौरान केडीबी प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर बंदोबस्त भी किए गए थे। पुलिस प्रशासन के कई अधिकारी भी पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर मौजूद रहे। जबकि केडीबी की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए बार-बार अनाउंसमेंट की जा रही थी। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि देव जयंती भी मनाई जाती हैं, इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व अधिक हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार न्याय के देवता शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हुआ था। इस दिन शनि देव की पूजा अर्चना करने का विशेष फल श्रद्धालुओं को मिलता है। वहीं ज्येष्ठ अमावस्या के चलते कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से शहर के कई स्थानों पर हवन किए गए और भंडारे भी लगाए गए। जबकि शनि देव जयंती के चलते शनि देव के मंदिरों में भी रौनक बनी रही। श्रद्धालुओं ने शनि मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की।
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अमावस्या पर दान करने से पितर होते हैं प्रसन्न : प्रेम कुमार
पंडित प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था, जिसके चलते ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती मनाई जाती हैं। इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान करने के बाद दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही न्याय के देवता शनिदेव की पूजा अर्चना करने का भी महत्व है। इसके अलावा महिलाएं भी इस दिन वट सावित्री का व्रत भी रखती हैं।
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