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पितरों की आत्मा की शांति के लिए सरस्वती तीर्थ पहुंचे श्रद्धालु

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Mar 2022 02:42 AM IST
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Devotees reached Saraswati Tirtha for the peace of the souls of ancestors , Kurukshetra
सरस्वती तीर्थ पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। आधी अधूरी तैयारी के साथ बुधवार को चैत्र चौदस मेला शुरू हो गया। वहीं श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए सरस्वती तीर्थ पर पूजा पाठ किया है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और अन्य प्रदेशों से श्रद्धालुओं को लाने और ले जाने के लिए विभाग की तरफ से बसें चलाई गई हैं। सरस्वती तीर्थ के आस पास के क्षेत्र पर पैनी निगाह रखी जा रही है, इसके लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कंट्रोल रूम में बैठकर असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
मेला प्रशासक एवं एसडीएम सोनू राम ने कहा कि प्रख्या चैत्र चौदस मेला विधिवत रूप शुरू हो गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए हुड्डा ग्राउंड में विशेष प्रबंध किए हैं। हुड्डा ग्राउंड में झूलों का मजा लेने के लिए बच्चे व अन्य लोग पहुंचने शुरू हो गए हैं।
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मेले में लाखों की तादाद में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के भीड़ में खो जाने व फिर छोटे बच्चों के बिछुड़ों से मिलाने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की तरफ से बाल भवन में सूचना प्रसारण केंद्र स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि मेले में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए शहर के बाहरी ओर आंतरिक जगहों पर नाकाबंदी की गई है। पुलिस कर्मचारियों ने सुरक्षा की कमान संभाली हुई है। मेला क्षेत्र के आस पास पांच पुलिस चेक पोस्ट बनाई गई हैं। आसपास के जिलों से आए करीब 250 पुलिस कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
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तीर्थ स्थल पर पहुंचे सरसों का तेल, सूत का धागा बेचने वाले
सरस्वती तीर्थ पर विशेष रूप से सूत का धागा, दीये व सरसों का तेल बेचने वाले पहुंच चुके हैं। सूत का प्रयोग प्रेत पीपल पर बांधने में किया जाता है। सरसों के तेल से श्रद्धालु तट पर दीपदान करते हैं। स्वामी कार्तिकेय मंदिर में भी तेल अर्पित किया जाता है।

मंत्रोच्चार के साथ मेले का शुभारंभ
एसडीएम सोनू राम ने मेले में पूजा अर्चना की। मंत्रोच्चारण के बीच एसडीएम ने मेले का शुभारंभ किया। एसडीएम ने कहा कि चैत्र चौदस मेले का संबंध महाभारत काल से है, इसलिए मेले को यादगार बनाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। किसी भी श्रद्धालु या शहरवासी को किसी प्रकार की कोई दिक्कत है तो उनसे सीधे संपर्क कर सकता है या फिर सूचना केंद्र में किसी भी समस्या से संबंधित सूचना दर्ज करा सकता है।
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