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Kurukshetra News: जग ज्योति दरबार में श्रद्धालुओं ने की गो सेवा
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कुरुक्षेत्र। गायों को चारा खिलाते मंहत राजेंद्र पुरी। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में महंत राजेंद्र पुरी की चल रही 11 दिवसीय कठोर खड़ी तपस्या के चलते दरबार में मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंगलवार को श्रद्धा भाव से गो माता की सेवा की।
गो सेवा करते हुए महंत ने कहा कि कठोर खड़ी तपस्या और गोसेवा दोनों ही भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता में परम पुण्य और ईश्वर कृपा पाने के मार्ग माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तपस्या से आंतरिक शक्ति बढ़ती है, वहीं गो सेवा से करुणा, सुख-समृद्धि, ग्रह शांति और देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। यह दोनों मिलकर मनुष्य को पूर्णता की ओर ले जाते हैं जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि गो सेवा से आंतरिक शांति, संतोष और करुणा का भाव बढ़ता है जो आत्मिक सुख का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि गाय को भोजन देने और उसकी सेवा करने से घर में धन, सुख और समृद्धि आती है और लक्ष्मी का आगमन होता है। महंत ने बताया कि जब कठोर तपस्या के साथ निस्वार्थ भाव से गो सेवा जुड़ जाती है, तो साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लोकों में पूर्णता मिलती है।
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गो सेवा करते हुए महंत ने कहा कि कठोर खड़ी तपस्या और गोसेवा दोनों ही भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता में परम पुण्य और ईश्वर कृपा पाने के मार्ग माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तपस्या से आंतरिक शक्ति बढ़ती है, वहीं गो सेवा से करुणा, सुख-समृद्धि, ग्रह शांति और देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। यह दोनों मिलकर मनुष्य को पूर्णता की ओर ले जाते हैं जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
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महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि गो सेवा से आंतरिक शांति, संतोष और करुणा का भाव बढ़ता है जो आत्मिक सुख का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि गाय को भोजन देने और उसकी सेवा करने से घर में धन, सुख और समृद्धि आती है और लक्ष्मी का आगमन होता है। महंत ने बताया कि जब कठोर तपस्या के साथ निस्वार्थ भाव से गो सेवा जुड़ जाती है, तो साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लोकों में पूर्णता मिलती है।

कुरुक्षेत्र। गायों को चारा खिलाते मंहत राजेंद्र पुरी। विज्ञप्ति
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