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Kurukshetra News: श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती की मूर्ति का किया विसर्जन, नहर किनारे उमड़ी रही भीड़
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कुरुक्षेत्र।
वसंत पंचमी से अगले दिन मंगलवार को पूर्वांचल समाज के लोगों ने बड़े धूमधाम से सरस्वती विसर्जन किया। श्रद्धालुओं ने सरस्वती वंदना और संगीत प्रस्तुत करते हुए ज्योतिसर नहर में मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन किया। वहीं प्रशासन की ओर से इस आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां की गई थीं।
श्रद्धालुओं ने वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित किया तथा मां के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूजा के बाद एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजित किया गया। कहीं शोभा यात्रा तो कहीं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कलाकारों ने मां सरस्वती के ज्ञान व कला के महत्व के बारे में बताया। दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा।
सरस्वती विसर्जन के मुख्य आकर्षण के रूप में सजाई गई देवी की मूर्ति का नदी में विसर्जन किया गया। मूर्ति को सजावट से अलंकृत किया गया था, जिसमें पारंपरिक फूलों और रंगोली से शोभा बढ़ाई गई थी। विसर्जन के समय लोगों ने जल में डूबती मूर्ति को विदाई देते हुए उत्साह से नृत्य किया और पारंपरिक गीत गाए। कहीं संगीत तो कहीं ढोल की थाप सुनाई दी। इस मौके पर पूर्वांचल समाज पिहोवा के प्रधान पंचलाल, कर्मजीत, टीका, काका और अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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वसंत पंचमी से अगले दिन मंगलवार को पूर्वांचल समाज के लोगों ने बड़े धूमधाम से सरस्वती विसर्जन किया। श्रद्धालुओं ने सरस्वती वंदना और संगीत प्रस्तुत करते हुए ज्योतिसर नहर में मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन किया। वहीं प्रशासन की ओर से इस आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां की गई थीं।
श्रद्धालुओं ने वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित किया तथा मां के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूजा के बाद एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजित किया गया। कहीं शोभा यात्रा तो कहीं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कलाकारों ने मां सरस्वती के ज्ञान व कला के महत्व के बारे में बताया। दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा।
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सरस्वती विसर्जन के मुख्य आकर्षण के रूप में सजाई गई देवी की मूर्ति का नदी में विसर्जन किया गया। मूर्ति को सजावट से अलंकृत किया गया था, जिसमें पारंपरिक फूलों और रंगोली से शोभा बढ़ाई गई थी। विसर्जन के समय लोगों ने जल में डूबती मूर्ति को विदाई देते हुए उत्साह से नृत्य किया और पारंपरिक गीत गाए। कहीं संगीत तो कहीं ढोल की थाप सुनाई दी। इस मौके पर पूर्वांचल समाज पिहोवा के प्रधान पंचलाल, कर्मजीत, टीका, काका और अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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