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Kurukshetra News: आंखों व सिर दर्द के साथ घटता आंखों का घेरा काला मोतिया का कारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Mar 2024 03:09 AM IST
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Decreasing circles around eyes along with eye pain and headache, cause of cataract
कुरुक्षेत्र। आंखों और सिर दर्द की समस्या के साथ-साथ अब घटता आंखों का घेरा भी काला मोतिया (ग्लूकोमा) का बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ इसे साइलेंट किलर की संज्ञा दे रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना काला मोतिया से पीड़ित ऐसे दो-तीन मरीज सामने आ रहे हैं, जिन्हें यह मालूम ही नहीं कि वे काला मोतिया की चपेट में आ चुके हैं।
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जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से विश्व काला मोतिया सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने 40 साल से अधिक आयु वाले मरीजों के नेत्रों की जांच की गई। पिछले एक हफ्ते में 15 से 20 मरीजों को काला मोतिया के लक्षण मिले हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मेजपाल और डॉ. गुंजन मेहता ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ आंखों की साइड की नजर में कमी हो जाती है, जो काला मोतिया का सबसे बड़ा लक्षण होता है। व्यक्ति को अपनी आंखों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। ऐसा जरूरी नहीं कि एक उम्र के बाद आंखों में सफेद मोतिया की शिकायत हो, यह काला मोतिया भी हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि सफेद मोतिया और काला मोतिया दोनों का फर्क समझने की जरूरत है, क्योंकि सफेद मोतिया का सामान्य ऑपरेशन करके आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है, लेकिन ग्लूकोमा के कारण आंखों की खोई रोशनी वापस नहीं लाई जा सकती। सफेद मोतिया ज्यादातर उम्रदराज लोगों को होता है। उम्र के हिसाब से व्यक्ति को धुंधला दिखाई देता है। ऑपरेशन करके सफेद मोतिया को ठीक किया जा सकता है लेकिन बढ़ती उम्र व परिवार में किसी को काला मोतिया की शिकायत होना, आंखों में अधिक दबाव, दूर व निकट दृष्टि रोग, मधुमेह, आंखों में चोट लगना और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल करने के कारण काला मोतिया का कारण बन सकती है।
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डॉ. मेहता का कहना है कि काला मोतिया ऐसी बीमारी है कि इससे शुरुआती दौर में कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन खोई हुई रोशनी को वापस नहीं लाया जा सकता। काला मोतिया के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और न ही दर्द होता है। इसलिए इसे साइलेंट ब्लाइडिंग डिजीज कहा जाता है। जब समस्या गंभीर हो जाती है तब आंखों में ब्लाइंड स्पाॅट बनने लगते हैं। कहा कि व्यक्ति को 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित जांच करानी चाहिए। काला मोतिया का पता लगाने के लिए प्रेशर की जांच, पैरामीटर टेस्ट, गोनियोस्कॉपी और ओसीटी जैसे टेस्ट किए जाते हैं।



काला मोतिया के लक्षण

-आंखों और सिर में तेज दर्द होना।

-नजर कमजोर होना।

-धुंधला दिखाई देना।

-आंखें लाल होना, रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना।

-जी मिचलाना और उल्टी आना।
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