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गीता में निहित है विश्व शांति का उपाय
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विश्व शांति के उपाय खोजने के लिए हमें बिना लोभ के गीता आधारित नीड कॉमिक्स को अपनाना होगा। रचनात्मकता के साथ सही परिप्रेक्ष्य में वैश्विक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए हमें शांति की शक्ति को सामाजिक मित्रता और सद्भाव के रूप में सुरक्षा और शांति की तनाव मुक्त स्थिति के रूप में समझना होगा। यह कहना है स्टारेक्स विश्वविद्यालय गुरुग्राम के कुलपति प्रो. मदन मोहन गोयल का। वे शुक्रवार को केयू के गीता अध्ययन केंद्र व युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘‘विश्व शांति के लिए गीता आधारित नीडोनॉमिक्स की प्रासंगिकता‘‘ विषय पर बात की।
प्रो. गोयल ने कहा कि विश्व शांति के लिए चिंता किए बिना काम करने के लिए हमें आत्मा के प्रति सचेत रहना होगा, क्योंकि सिर, हृदय और हाथों के उचित, उत्पादक और व्यावहारिक उपयोग की वास्तविक शिक्षा की आज आवश्यकता है। उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित मुफ्तखोरी समस्या, आत्म-चेतना के साथ उपयोगकर्ता द्वारा भुगतान सिद्धांत के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कहता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सिरसा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राकेश वधवा ने अपनी परंपरा व संस्कृति को सहेजने रखने का संदेश देते हुए मानवता को बनाए रखने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में तीन सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से शिवानी शर्मा, मॉरिशस से रोशन बौद्ध, यूनाइटेड स्टेट से रिसोर्स पर्सन मैक्गर्जर एल चर्च तथा दूसरे सत्र में छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति एडीएन वाजपेई ने सत्र की अध्यक्षता की। सोहन पाल आर्य गुरुकुल कांगड़ी विश्वानंद मॉरिशस, हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. दिनेश शास्त्री, पिहोवा डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. कामदेव झा ने संगोष्ठी में विशेष रूप से उपस्थित रहे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र ने अपना उद्बोधन रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा ने की और सभी से गीता को अपने जीवन में धारण करने का आह्वान किया। इस अवसर पर संगोष्ठी के संयोजक प्रो. आरके देसवाल, मंच संचालक डॉ. आबिद अली, श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र के सहायक इंचार्ज प्रो. राजपाल, डॉ. विजय कुमार, डॉ. भगत सिंह, डॉ. महासिंह पूनिया, अरुण, डॉ. सरिता आर्य, डॉ. रामचंद्र, रणबीर बतान, राजेंद्र सैनी, अरुण कुमार, दर्शन, प्रो. विभा अग्रवाल, प्रो. ललित गौड़, प्रो. कृष्णा देवी सहित अन्य उपस्थित रहे।
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प्रो. गोयल ने कहा कि विश्व शांति के लिए चिंता किए बिना काम करने के लिए हमें आत्मा के प्रति सचेत रहना होगा, क्योंकि सिर, हृदय और हाथों के उचित, उत्पादक और व्यावहारिक उपयोग की वास्तविक शिक्षा की आज आवश्यकता है। उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित मुफ्तखोरी समस्या, आत्म-चेतना के साथ उपयोगकर्ता द्वारा भुगतान सिद्धांत के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कहता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सिरसा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राकेश वधवा ने अपनी परंपरा व संस्कृति को सहेजने रखने का संदेश देते हुए मानवता को बनाए रखने का आह्वान किया।
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संगोष्ठी में तीन सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से शिवानी शर्मा, मॉरिशस से रोशन बौद्ध, यूनाइटेड स्टेट से रिसोर्स पर्सन मैक्गर्जर एल चर्च तथा दूसरे सत्र में छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति एडीएन वाजपेई ने सत्र की अध्यक्षता की। सोहन पाल आर्य गुरुकुल कांगड़ी विश्वानंद मॉरिशस, हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. दिनेश शास्त्री, पिहोवा डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. कामदेव झा ने संगोष्ठी में विशेष रूप से उपस्थित रहे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र ने अपना उद्बोधन रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा ने की और सभी से गीता को अपने जीवन में धारण करने का आह्वान किया। इस अवसर पर संगोष्ठी के संयोजक प्रो. आरके देसवाल, मंच संचालक डॉ. आबिद अली, श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र के सहायक इंचार्ज प्रो. राजपाल, डॉ. विजय कुमार, डॉ. भगत सिंह, डॉ. महासिंह पूनिया, अरुण, डॉ. सरिता आर्य, डॉ. रामचंद्र, रणबीर बतान, राजेंद्र सैनी, अरुण कुमार, दर्शन, प्रो. विभा अग्रवाल, प्रो. ललित गौड़, प्रो. कृष्णा देवी सहित अन्य उपस्थित रहे।
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