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सुख-दुख में हर पल साथ निभाएंगे, एक जन्म नहीं, सातों जन्म में पति पत्नी बन आएंगे
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सुहागिनों ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का विधि-विधान से व्रत रखा और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन कर आशीर्वाद लिया। पहली बार करवाचौथ का व्रत रख रही सुहागिनें काफी उत्साहित नजर आईं, लेकिन कुछ महिलाओं ने दूर-दराज रह रहे अपने पति का वीडियो कॉल करके दीदार किया। करवा चौथ के पर्व पर दिनभर मेहंदी लगवाने व सजने संवरने का सिलसिला जारी रहा। करवा चौथ के पर्व पर निजी होटलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। यहां गीत संगीत के साथ विभिन्न तरह की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई।
इससे पहले दोपहर को सुहागिनों ने सामूहिक रूप से करवाचौथ की कहानी सुनी। इसी कड़ी में राजेंद्र नगर स्थित कुटिया, सनातन धर्म मंदिर सहित कई जगह बड़ी तादाद में महिलाओं ने बुजुर्ग महिलाओं और संतों के सानिध्य में करवाचौथ व्रत मनाया। इस दौरान महिलाओं को करवा चौथ के व्रत का महत्व बताया गया।
पंडित दीपक शर्मा ने बताया कि भारतीय नारी के तप, त्याग व्रत की महिमा अपरंपार है। भारतीय नारी सदियों से ही व्रत करती रही है। करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के संबंधों को घनिष्ठ बनाता है और पत्नी की कामना से उसके पति के अनेक कष्ट दूर होते हैं।
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करवाचौथ का व्रत रखने वाली सुहागिन चांद के दीदार करने के लिए बड़ी बेसब्री से इंतजार करती रहीं। वह कभी पति तो कभी सास और ननद आदि से पूछती रहीं कि चांद तो नहीं निकला। जैसे ही रात साढ़े 8 बजे चांद निकला तो उनके चेहरे पर खुशी की चमक देखते ही बन रही थी। पहला करवाचौथ का व्रत रखने वाली सुहागिनों की खुशी का ठिकाना कुछ अलग ही दिखाई दिया। जैसे ही चांद निकला तो वह पूजा की थाली और छलनी लेकर अपने-अपने घरों की छतों पर पहुंच गई। चांद का दीदार कर जल का अर्घ्य दिया और छलनी से पति के दर्शन कर जल ग्रहण किया। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोला। वहीं कुछ पुरुषों ने भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखा। वहीं, दूसरी ओर जिनकी शादी जल्द ही होने वाली है। उन युवतियों ने भी होने वाले पति के लिए भी करवाचौथ का व्रत रखा और सुहागिन की तरह ही व्रत रखकर होने वाले पति की लंबी उम्र की कामना की।
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इससे पहले दोपहर को सुहागिनों ने सामूहिक रूप से करवाचौथ की कहानी सुनी। इसी कड़ी में राजेंद्र नगर स्थित कुटिया, सनातन धर्म मंदिर सहित कई जगह बड़ी तादाद में महिलाओं ने बुजुर्ग महिलाओं और संतों के सानिध्य में करवाचौथ व्रत मनाया। इस दौरान महिलाओं को करवा चौथ के व्रत का महत्व बताया गया।
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पंडित दीपक शर्मा ने बताया कि भारतीय नारी के तप, त्याग व्रत की महिमा अपरंपार है। भारतीय नारी सदियों से ही व्रत करती रही है। करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के संबंधों को घनिष्ठ बनाता है और पत्नी की कामना से उसके पति के अनेक कष्ट दूर होते हैं।
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करवाचौथ का व्रत रखने वाली सुहागिन चांद के दीदार करने के लिए बड़ी बेसब्री से इंतजार करती रहीं। वह कभी पति तो कभी सास और ननद आदि से पूछती रहीं कि चांद तो नहीं निकला। जैसे ही रात साढ़े 8 बजे चांद निकला तो उनके चेहरे पर खुशी की चमक देखते ही बन रही थी। पहला करवाचौथ का व्रत रखने वाली सुहागिनों की खुशी का ठिकाना कुछ अलग ही दिखाई दिया। जैसे ही चांद निकला तो वह पूजा की थाली और छलनी लेकर अपने-अपने घरों की छतों पर पहुंच गई। चांद का दीदार कर जल का अर्घ्य दिया और छलनी से पति के दर्शन कर जल ग्रहण किया। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोला। वहीं कुछ पुरुषों ने भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखा। वहीं, दूसरी ओर जिनकी शादी जल्द ही होने वाली है। उन युवतियों ने भी होने वाले पति के लिए भी करवाचौथ का व्रत रखा और सुहागिन की तरह ही व्रत रखकर होने वाले पति की लंबी उम्र की कामना की।