{"_id":"691cc9e57d64d2a4ec059687","slug":"cultural-colours-on-display-at-pilgrimage-sites-across-48-kos-folk-artists-throng-the-geeta-mahotsav-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-145540-2025-11-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: 48 कोस भूमि के तीर्थों पर दिखा संस्कृति का रंग, गीता महोत्सव में लोक कलाकारों की धूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: 48 कोस भूमि के तीर्थों पर दिखा संस्कृति का रंग, गीता महोत्सव में लोक कलाकारों की धूम
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। हरियाणवी नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के घाटों से लेकर 48 कोस भूमि के पवित्र तीर्थों तक संस्कृति की गूंज सुनाई दे रही है। विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां ब्रह्मसरोवर पर श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं, वहीं हरियाणा कला परिषद की ओर से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है।
हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने बताया कि परिषद की ओर से कुरुक्षेत्र और कैथल जिलों के कुल 74 तीर्थ स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में अनुबंधित कलाकार दल हरियाणवी नृत्य, रागनी, भजन और लोकगीतों के माध्यम से अपनी विरासत का जीवंत परिचय दे रहे हैं। कार्यक्रमों की शुरुआत कैथल जिले के डीग स्थित कण्व ऋषि तीर्थ से हुई, यहां दिनेश कुमार और उनके दल ने धार्मिक प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बनाया। इसके बाद सोम तीर्थ, सैंसा में मनोज जाले और बटेश्वर तीर्थ, बरोट में निखिल व दल ने अपनी प्रस्तुतियों से भावपूर्ण ढंग से गीता महोत्सव का महत्व सामने रखा।
इसी क्रम में कोटिकूट तीर्थ, क्योड़क में भाल सिंह और उनके साथी कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। नागेंद्र शर्मा ने बताया कि यह सांस्कृतिक शृंखला 1 दिसंबर तक लगातार जारी रहेगी। इस अवधि में 48 कोस भूमि के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर हरियाणा कला परिषद की प्रस्तुतियां गीता महोत्सव के महायज्ञ में अपनी महत्वपूर्ण आहुति देंगी। इन अनूठे प्रयासों से गीता महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर उभर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने बताया कि परिषद की ओर से कुरुक्षेत्र और कैथल जिलों के कुल 74 तीर्थ स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में अनुबंधित कलाकार दल हरियाणवी नृत्य, रागनी, भजन और लोकगीतों के माध्यम से अपनी विरासत का जीवंत परिचय दे रहे हैं। कार्यक्रमों की शुरुआत कैथल जिले के डीग स्थित कण्व ऋषि तीर्थ से हुई, यहां दिनेश कुमार और उनके दल ने धार्मिक प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बनाया। इसके बाद सोम तीर्थ, सैंसा में मनोज जाले और बटेश्वर तीर्थ, बरोट में निखिल व दल ने अपनी प्रस्तुतियों से भावपूर्ण ढंग से गीता महोत्सव का महत्व सामने रखा।
विज्ञापन
इसी क्रम में कोटिकूट तीर्थ, क्योड़क में भाल सिंह और उनके साथी कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। नागेंद्र शर्मा ने बताया कि यह सांस्कृतिक शृंखला 1 दिसंबर तक लगातार जारी रहेगी। इस अवधि में 48 कोस भूमि के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर हरियाणा कला परिषद की प्रस्तुतियां गीता महोत्सव के महायज्ञ में अपनी महत्वपूर्ण आहुति देंगी। इन अनूठे प्रयासों से गीता महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर उभर रहा है।

कुरुक्षेत्र। हरियाणवी नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद
विज्ञापन