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दीवार गिरने से घायल किशोर के उपचार में लापरवाही पर हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Thu, 06 Oct 2016 12:35 AM IST
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रादौर रोड स्थित एक निजी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में बुधवार शाम को एक मरीज के परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
- फोटो : Amar Ujala
रादौर रोड स्थित एक निजी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में बुधवार शाम को एक मरीज के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण दो माह पहले उनके बच्चे का बाजू काटना पड़ी लेकिन अस्पताल प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। मामला बिगड़ता देख अस्पताल में मौजूद कई डॉक्टर वहां से निकल गए। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया। इधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यदि मरीज के इलाज में कोई लापरवाही बरती गई है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
15 वर्षीय मरीज आकाश के पिता महेंद्र ने बताया कि 10 अगस्त 2016 को आकाश दीवार से गिर गया था। उसके बाजू की हड्डी टूट गई थी। उसे निजी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने कच्चा पलस्तर करके दो दिन बाद ऑपरेशन करने की बात कही। इसके लिए आठ हजार रुपये का खर्च बताया गया। जब पलस्तर के बाद भी आकाश को आराम नहीं मिला जो फिर डॉक्टरों दिखाया। आरोप है कि डॉक्टर ने आकाश को इंजेक्शन लगाया था लेकिन अगली सुबह उसकी बाजू नीली पड़ गई। डॉक्टर को फिर से दिखाया तब उन्होंने पलस्तर निकलवा दिया। कुछ दवाइयां दी और हाथ को एक घंटे तक ऊपर करके बांध दिया था।
महेेंद्र ने बताया कि एक घंटे तक ऊपर रखने से आकाश के हाथ में सूजन आ गई थी। इसके बाद अचानक बाजू कई जगह से फटने लगी। हालत बिगड़ने लगी तब डॉक्टर ने आकाश को पीजीआई ले जाने के लिए कह दिया। 11 अगस्त को पीजीआई में उसका बाजू काटना पड़ा था। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद से लगातार अस्पताल प्रशासन हमें कार्रवाई का आश्वासन देकर टालता रहा है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
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संबंधित डॉक्टर से संपर्क नहीं हो पा रहा
इस मामले में अस्पताल संचालक का कहना है कि मामले के बाद से संबंधित डॉक्टर अस्पताल नहीं आएं। उसने कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इलाज में लापरवाही बरती गई है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इधर थाना प्रभारी निर्मल कुमार का कहना हैं कि मामला संज्ञान आया है। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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15 वर्षीय मरीज आकाश के पिता महेंद्र ने बताया कि 10 अगस्त 2016 को आकाश दीवार से गिर गया था। उसके बाजू की हड्डी टूट गई थी। उसे निजी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने कच्चा पलस्तर करके दो दिन बाद ऑपरेशन करने की बात कही। इसके लिए आठ हजार रुपये का खर्च बताया गया। जब पलस्तर के बाद भी आकाश को आराम नहीं मिला जो फिर डॉक्टरों दिखाया। आरोप है कि डॉक्टर ने आकाश को इंजेक्शन लगाया था लेकिन अगली सुबह उसकी बाजू नीली पड़ गई। डॉक्टर को फिर से दिखाया तब उन्होंने पलस्तर निकलवा दिया। कुछ दवाइयां दी और हाथ को एक घंटे तक ऊपर करके बांध दिया था।
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महेेंद्र ने बताया कि एक घंटे तक ऊपर रखने से आकाश के हाथ में सूजन आ गई थी। इसके बाद अचानक बाजू कई जगह से फटने लगी। हालत बिगड़ने लगी तब डॉक्टर ने आकाश को पीजीआई ले जाने के लिए कह दिया। 11 अगस्त को पीजीआई में उसका बाजू काटना पड़ा था। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद से लगातार अस्पताल प्रशासन हमें कार्रवाई का आश्वासन देकर टालता रहा है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
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संबंधित डॉक्टर से संपर्क नहीं हो पा रहा
इस मामले में अस्पताल संचालक का कहना है कि मामले के बाद से संबंधित डॉक्टर अस्पताल नहीं आएं। उसने कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इलाज में लापरवाही बरती गई है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इधर थाना प्रभारी निर्मल कुमार का कहना हैं कि मामला संज्ञान आया है। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।