{"_id":"5ab94a264f1c1b53408b516a","slug":"181522092582-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सारसा मामला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सारसा मामला
Updated Tue, 27 Mar 2018 12:59 AM IST
विज्ञापन
तीन बच्चों की हत्या मामले में पिता को मिली जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जो पिता कहते थे जमानत नहीं कराऊंगा। आज उन्होंने तीन बच्चों के हत्या प्रकरण और शांति भंग करने के मामले में विचाराधीन कैदी पुत्र को 20 हजार मुचलके पर जमानत दिला कर रिहाई कराने में अहम भूमिका निभाई। इधर जमानत की सूचना जब गांव सारसा वासियों को लगी तो उनमें जबरदस्त आक्रोश था। उन्होेेंने कहा कि वह पहले ही दिन से एसआईटी की जांच से संतुष्ट नहीं थे। अब जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर वे इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करेंगे। बता दें कि पिहोवा उपमंडल के गांव सारसा निवासी तीन मासूम बच्चों की हत्या के बहुचर्चित प्रकरण में बच्चों का पिता सोनू तीन माह 21 दिन से जेल में था। बच्चों की हत्या के बाद से गांव सारसा में सोनू और बच्चों के चाचा जगदीप मलिक का काफी विरोध हो रहा था। तब गांव वासियों के साथ लगकर परिवार भी सोनू और जगदीप की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गांव वासियों के विरोधी सुर में सुर मिला रहे थे, लेकिन सोमवार को पूरी प्लानिंग से गुपचुप ढंग से सोनू के पिता जीताराम मलिक ने बेटे को जमानत दिलाकर उसे जेल से बाहर लाने में अहम भूमिका निभाई। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनू को पिहोवा की तहसीलदार चेतना चौधरी द्वारा जमानत दिए जाने के बाद सोमवार देर रात को जेल से रिहा किया गया है। इसके पश्चात सोनू को किसी रिश्तेदार के पास भेजने की व्यवस्था की गई है, क्योंकि परिवार के लोग जानते थे कि सोनू के जेल से बाहर आने पर गांव वासियों का गुस्सा भड़क सकता है।
एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार से मिली जमानत
पुलिस की एसएनसी मिलने के बाद सोमवार को सोनू के पिता जीताराम एसडीएम कोर्ट पिहोवा में जमानत प्रक्रिया के लिए पहुंचे थे, लेकिन एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार चेतना चौधरी ने 20 हजार रुपये मुचलके पर सोनू को जमानत दी। उल्लेखनीय है कि सोनू के खिलाफ पुलिस ने हत्या का केस दर्ज नहीं किया था। इसकी वजह से उसके चचेरे भाई की पत्नी मुखर हुई थी और इस मामले को लेकर एक ऑडियो भी वायरल हुई थी। जिसमें पुलिस द्वारा सोनू को केस से बाहर लाने से संबंधित बातें उस समय सामने आई थी, हालांकि जगदीप मलिक की गिरफ्तारी के दौरान से ही सोनू भी पुलिस की गिरफ्त में था। उसे 107, 51 धारा में ही नामजद किया गया था।
यह था मामला
पिहोवा के गांव सारसा वासी सोनू के तीनों बच्चे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। जिसके बाद उनकी तलाश कई जगहों पर की गई थी, आखिरकार तीनों बच्चों के शव 20 नवंबर 2017 को पंचकूला के मोरनी इलाके से बरामद हुए थे। बाद में पुलिस ने इस मामले में सोनू और उसके चचेरे भाई जगदीप को हिरासत में लिया था।
विज्ञापन
मुख्य आरोपी चाचा की हुई थी जेल में संदिग्ध हालत में मौत
पुलिस पहले ही दिन से इस मामले में जगदीप मलिक को मुख्य दोषी मानकर चल रही थी। पुलिस ने जगदीप के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में रहस्यमय परिस्थितियों में जगदीप की जिला कारागार में मौत हो गई थी, जिसे सुसाइड का मामला बताया गया था।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जो पिता कहते थे जमानत नहीं कराऊंगा। आज उन्होंने तीन बच्चों के हत्या प्रकरण और शांति भंग करने के मामले में विचाराधीन कैदी पुत्र को 20 हजार मुचलके पर जमानत दिला कर रिहाई कराने में अहम भूमिका निभाई। इधर जमानत की सूचना जब गांव सारसा वासियों को लगी तो उनमें जबरदस्त आक्रोश था। उन्होेेंने कहा कि वह पहले ही दिन से एसआईटी की जांच से संतुष्ट नहीं थे। अब जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर वे इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करेंगे। बता दें कि पिहोवा उपमंडल के गांव सारसा निवासी तीन मासूम बच्चों की हत्या के बहुचर्चित प्रकरण में बच्चों का पिता सोनू तीन माह 21 दिन से जेल में था। बच्चों की हत्या के बाद से गांव सारसा में सोनू और बच्चों के चाचा जगदीप मलिक का काफी विरोध हो रहा था। तब गांव वासियों के साथ लगकर परिवार भी सोनू और जगदीप की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गांव वासियों के विरोधी सुर में सुर मिला रहे थे, लेकिन सोमवार को पूरी प्लानिंग से गुपचुप ढंग से सोनू के पिता जीताराम मलिक ने बेटे को जमानत दिलाकर उसे जेल से बाहर लाने में अहम भूमिका निभाई। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनू को पिहोवा की तहसीलदार चेतना चौधरी द्वारा जमानत दिए जाने के बाद सोमवार देर रात को जेल से रिहा किया गया है। इसके पश्चात सोनू को किसी रिश्तेदार के पास भेजने की व्यवस्था की गई है, क्योंकि परिवार के लोग जानते थे कि सोनू के जेल से बाहर आने पर गांव वासियों का गुस्सा भड़क सकता है।
एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार से मिली जमानत
पुलिस की एसएनसी मिलने के बाद सोमवार को सोनू के पिता जीताराम एसडीएम कोर्ट पिहोवा में जमानत प्रक्रिया के लिए पहुंचे थे, लेकिन एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार चेतना चौधरी ने 20 हजार रुपये मुचलके पर सोनू को जमानत दी। उल्लेखनीय है कि सोनू के खिलाफ पुलिस ने हत्या का केस दर्ज नहीं किया था। इसकी वजह से उसके चचेरे भाई की पत्नी मुखर हुई थी और इस मामले को लेकर एक ऑडियो भी वायरल हुई थी। जिसमें पुलिस द्वारा सोनू को केस से बाहर लाने से संबंधित बातें उस समय सामने आई थी, हालांकि जगदीप मलिक की गिरफ्तारी के दौरान से ही सोनू भी पुलिस की गिरफ्त में था। उसे 107, 51 धारा में ही नामजद किया गया था।
विज्ञापन
यह था मामला
पिहोवा के गांव सारसा वासी सोनू के तीनों बच्चे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। जिसके बाद उनकी तलाश कई जगहों पर की गई थी, आखिरकार तीनों बच्चों के शव 20 नवंबर 2017 को पंचकूला के मोरनी इलाके से बरामद हुए थे। बाद में पुलिस ने इस मामले में सोनू और उसके चचेरे भाई जगदीप को हिरासत में लिया था।
विज्ञापन
मुख्य आरोपी चाचा की हुई थी जेल में संदिग्ध हालत में मौत
पुलिस पहले ही दिन से इस मामले में जगदीप मलिक को मुख्य दोषी मानकर चल रही थी। पुलिस ने जगदीप के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में रहस्यमय परिस्थितियों में जगदीप की जिला कारागार में मौत हो गई थी, जिसे सुसाइड का मामला बताया गया था।