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आठ करोड़ का धान खुर्द-बुर्द करने का आरोप
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पुलिस ने सरकार से चावल निकालने के लिए लिया गया धान समय पर वापस न लौटाने और आठ करोड़ के धान को खुर्द बुर्द करने के आरोप में चार राइस मिल संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक ने बताया कि मैसर्ज श्री बाला सुंदरी राइस मिल भैंसी माजरा ने 2019-20 में सरकारी धान की मिलिंग का कार्य करने के लिए आवेदन किया था। इस पर जिला मिलिंग कमेटी कुरुक्षेत्र के आदेश के अनुसार खाद्य एवं आपूर्ति विभाग कुरुक्षेत्र मंडी से धान अलाट के लिए उसे नियुक्त किया था। राइस मिलर के साथ विभागीय दिशा निर्देशों के अनुसार अनुबंध था और गारंटर आदि के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी की थी। मिल ने कुरुक्षेत्र मंडी से 67881.37.500 क्विंटल धान ग्रेड ए मिलिंग के लिए दुकानों से खरीदा था जिसे मिलर ने अपने वारदाने में भरकर निजी वाहनों में उठाकर राइस मिल में स्टोर कर लिया। इसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक को धान ग्रेड ए के सरकारी मानकों अनुसार सही मात्रा में गुणवत्ता की प्राप्ति रसीद दी गई थी। विभाग की ओर से राइस मिलर के पास धान की उक्त मात्रा को अधिक मानते हुए उसके मिल परिसर में 21494 कट्टे लगभग 8060.25 क्विंटल धान ग्रेड ए दोनों राइस मिल के मालिकों की सहमति से की रखी गई थी। शेष क्विंटल धान का निरीक्षण करने के बाद कट्टे खोलकर उसे सुखाने के लिए रख दिया उसकी मिलिंग करने का कार्य शुरू कर दिया गया थ। मिलिंग से उत्पन्न चावल की डिलीवरी 14 नवंबर 2019 को भारतीय खाद्य निगम को देनी शुरू कर दी गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा टीम गठित करके सरकारी धान की मिलिंग का कार्य करने वाले सभी राइस मिलों की भौतिक जांच करवाई गई। जिसमें राइस मिल की जांच हुई आकलन के अनुसार राइस मिल में वंचित मात्रा से लगभग 758 क्विंटल धान कम पाया गया। इसके बाद 30 दिसंबर 2019 को हुई भौतिक जांच में राइस मिल में निर्धारित मात्रा से 433.70 क्विंटल धान कम पाई गई। इस प्रकार उक्त राइस मिलर के खाते में विभाग की कुल 159523 पहले लगभग 59387.42.500 क्विंटल धान बकाया रह गया। इस प्रकार विभाग को लगभग आठ करोड़ रुपए की हानि हुई। विभाग ने कई बार संबंधित व्यक्तियों को हर्जाना भरने का नोटिस भेजा था लेकिन जवाब नहीं मिला। पुलिस ने खुर्द बुर्द हुए धान के आरोप में राइस मिल के चार हिस्सेदार बलकार सिंह, रमेश चंद, चंद्रावती व होशियार सिंह के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया है।
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पुलिस को दी शिकायत में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक ने बताया कि मैसर्ज श्री बाला सुंदरी राइस मिल भैंसी माजरा ने 2019-20 में सरकारी धान की मिलिंग का कार्य करने के लिए आवेदन किया था। इस पर जिला मिलिंग कमेटी कुरुक्षेत्र के आदेश के अनुसार खाद्य एवं आपूर्ति विभाग कुरुक्षेत्र मंडी से धान अलाट के लिए उसे नियुक्त किया था। राइस मिलर के साथ विभागीय दिशा निर्देशों के अनुसार अनुबंध था और गारंटर आदि के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी की थी। मिल ने कुरुक्षेत्र मंडी से 67881.37.500 क्विंटल धान ग्रेड ए मिलिंग के लिए दुकानों से खरीदा था जिसे मिलर ने अपने वारदाने में भरकर निजी वाहनों में उठाकर राइस मिल में स्टोर कर लिया। इसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक को धान ग्रेड ए के सरकारी मानकों अनुसार सही मात्रा में गुणवत्ता की प्राप्ति रसीद दी गई थी। विभाग की ओर से राइस मिलर के पास धान की उक्त मात्रा को अधिक मानते हुए उसके मिल परिसर में 21494 कट्टे लगभग 8060.25 क्विंटल धान ग्रेड ए दोनों राइस मिल के मालिकों की सहमति से की रखी गई थी। शेष क्विंटल धान का निरीक्षण करने के बाद कट्टे खोलकर उसे सुखाने के लिए रख दिया उसकी मिलिंग करने का कार्य शुरू कर दिया गया थ। मिलिंग से उत्पन्न चावल की डिलीवरी 14 नवंबर 2019 को भारतीय खाद्य निगम को देनी शुरू कर दी गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा टीम गठित करके सरकारी धान की मिलिंग का कार्य करने वाले सभी राइस मिलों की भौतिक जांच करवाई गई। जिसमें राइस मिल की जांच हुई आकलन के अनुसार राइस मिल में वंचित मात्रा से लगभग 758 क्विंटल धान कम पाया गया। इसके बाद 30 दिसंबर 2019 को हुई भौतिक जांच में राइस मिल में निर्धारित मात्रा से 433.70 क्विंटल धान कम पाई गई। इस प्रकार उक्त राइस मिलर के खाते में विभाग की कुल 159523 पहले लगभग 59387.42.500 क्विंटल धान बकाया रह गया। इस प्रकार विभाग को लगभग आठ करोड़ रुपए की हानि हुई। विभाग ने कई बार संबंधित व्यक्तियों को हर्जाना भरने का नोटिस भेजा था लेकिन जवाब नहीं मिला। पुलिस ने खुर्द बुर्द हुए धान के आरोप में राइस मिल के चार हिस्सेदार बलकार सिंह, रमेश चंद, चंद्रावती व होशियार सिंह के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया है।
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