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Kurukshetra News: पार्षदों ने तीसरी बार किया बजट बैठक का बहिष्कार
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शाहाबाद। बजट बैठक का बहिष्कार करते नपा प्रधान गुलशन कवात्तरा व पार्षद। स्वयं
- फोटो : udhampur news
शाहाबाद। नगर पालिका बजट बैठक का प्रधान गुलशन कवात्तरा, उप प्रधान भाविका कवात्तरा सहित सभी 19 पार्षदों ने फिर बहिष्कार किया जबकि मनोनीत पार्षद मुलख राज गुंबर व दीपक आनंद बैठक का समर्थन करते दिखाई दिए। वहीं बजट बैठक न होने के कारण 31 मार्च के बाद किसी भी प्रकार का भुगतान पालिका फंड से नहीं हो पाएगा। इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ने की संभावना है।
सुबह 10 बजे तय की गई बैठक में 11 बजे तक चार पार्षद ही पहुंचे। कोरम न होने पर बैठक को रद्द करना पड़ा। प्रधान गुलशन कवात्तरा ने कहा कि प्रधान सहित पार्षदों और उनके कार्यों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों से नगर पालिका सचिव की ओर से कोई टेंडर पास न किए जाने के पीछे किसी न किसी राजनीतिक षडयंत्र की बू आ रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह सभी पार्षदों के साथ डीएमसी और उपायुक्त से मिलेंगे और अपनी समस्याओं के बारे में बताएंगे। नगर पालिका प्रधान ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी वार्डों के रिपेयरिंग के अलावा तीन से चार टेंडर नहीं लगाए जाते तब तक बजट बैठक का सामूहिक बहिष्कार जारी रहेगा।
बैठकों में आने का कोई मतलब नहीं : वार्ड 10 से पार्षद ईशु सचदेवा ने कहा कि अगर बैठकों में शामिल होने के बाद भी विकास कार्य नहीं होने तो ऐसी बैठकों में आने का कोई मतलब नहीं बनता। बोर्ड की बैठक में काम लिखवाए जाते हैं लेकिन वे काम किए ही नहीं जाते।
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सुबह 10 बजे तय की गई बैठक में 11 बजे तक चार पार्षद ही पहुंचे। कोरम न होने पर बैठक को रद्द करना पड़ा। प्रधान गुलशन कवात्तरा ने कहा कि प्रधान सहित पार्षदों और उनके कार्यों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों से नगर पालिका सचिव की ओर से कोई टेंडर पास न किए जाने के पीछे किसी न किसी राजनीतिक षडयंत्र की बू आ रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह सभी पार्षदों के साथ डीएमसी और उपायुक्त से मिलेंगे और अपनी समस्याओं के बारे में बताएंगे। नगर पालिका प्रधान ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी वार्डों के रिपेयरिंग के अलावा तीन से चार टेंडर नहीं लगाए जाते तब तक बजट बैठक का सामूहिक बहिष्कार जारी रहेगा।
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बैठकों में आने का कोई मतलब नहीं : वार्ड 10 से पार्षद ईशु सचदेवा ने कहा कि अगर बैठकों में शामिल होने के बाद भी विकास कार्य नहीं होने तो ऐसी बैठकों में आने का कोई मतलब नहीं बनता। बोर्ड की बैठक में काम लिखवाए जाते हैं लेकिन वे काम किए ही नहीं जाते।
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