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Kurukshetra News: बीमारी से जूझ रहे कंप्यूटर इंजीनियर की मौत, कमरे में मिली अवसाद की दवाइयां
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कुरुक्षेत्र। मानसिक बीमारी से जूझ रहे एक कंप्यूटर इंजीनियर की सोमवार देर रात मौत हो गई। मृतक की पहचान हिमाचल प्रदेश के शिमला के रहने वाले 48 वर्षीय कुश शर्मा के रूप में हुई है, जो पिछले कई वर्ष से नोएडा की एक आईटी कंपनी में कार्यरत था। वह रविवार को शिमला से नोएडा काम पर जाने के लिए निकला था। रास्ते में अचानक तबीयत बिगड़ने पर वह कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पर उतर गया और पास के ही एक होटल में कमरा लेकर रुका हुआ था।
जांच अधिकारी महेश कुमार ने बताया कि उन्हें सोमवार देर रात होटल से सूचना मिली की एक युवक होटल में दो दिन से रुका हुआ है और वह बार-बार आवाज देने के बाद भी कमरा नहीं खोल रहा है और अंदर न ही किसी प्रकार की कोई हरकत हो रही है। सूचना पर वह अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और होटल का दरवाजा तोड़कर देखा तो कुश शर्मा बेड पर अचेत अवस्था में पड़े हुए थे और पास में ही कई तरह की गोलियां पड़ी हुई थी। उन्होंने तुरंत पुलिस की गाड़ी से ही उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। एफएसएल की टीम ने होटल के कमरे में पहुंचकर साक्ष्य जुटाए, जहां से उन्हें अवसाद की गोलियों के काफी रेपर मिले है।
वहीं सूचना पर मौके पर पहुंची मृतक की पत्नी व कंपनी में साथ काम करने वाले दोस्त राजेश ने बताया कि कुश शिमला से बस के माध्यम से चंडीगढ़ के लिए निकला। यहां से उसने दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ी थी। वह सोमवार को दोबारा कंपनी में अपना काम ज्वाइन कर रहा था। कुश पिछले आठ साल से मानसिक दबाव में चल रहा था। उसे सिजोफ्रेनिया नामक दिमागी बीमारी थी। पत्नी ने बताया कि उन्हें कुश ने रास्ते में अचानक तबीयत बिगड़ने की बात फोन पर बताई थी और बताया कि वह अगले स्टेशन कुरुक्षेत्र पर रुककर किसी होटल में आराम करेगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।
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राजेश ने बताया कि वह कंपनी में कई बार सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का अवार्ड भी अपने नाम कर चुका था। फिलहाल काफी समय से उन्होंने अपनी रिहाइश भी नोएडा के गाैतमबुद्ध नगर सेक्टर 120 अमरपाली जोडिया में की हुई है। वह अपने पीछे पत्नी व आठ साल की बेटी हो छोड़ गए है।
ओवरडोज से हुई मौत, विसरा जांच के लिए भेजा है : डॉ. नरेश
पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक फॉरेसिंक विशेषज्ञ डॉ. नरेश सैनी ने बताया कि प्राथमिकी दृष्टि में युवक की मौत अवसाद की गोलियाें की ओवरडोज लेने से हुई लग रही है। असल कारण जानने के लिए विसरा लेकर लैब में भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही असल कारण पता लग पाएंगे। डॉक्टर ने बताया कि पास से मिली गोलियों व परिजनों के बयान के हिसाब से यह सिजोफ्रेनिया नामक लाइलाज बीमारी से जूझ रहा था। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पीड़ित कल्पना व हकीकत में फर्क करना भूल जाता है और जैसी कल्पना एक बार दिमाग में आ गई वह उसी में कई-कई घंटों तक जीता रहता है, इसका अब तक कोई सटीक उपचार मिल नहीं पाया।
मामले की जांच जारी है : महेश कुमार
जांच अधिकारी महेश कुमार ने बताया कि युवक को अस्पताल ले जाते हुए वह एक बार होश में आया था और पानी मांगा। इस दौरान भी उसने कोई किसी प्रकार की उसके साथ हुई गलत बात का जिक्र नहीं किया था। फिलहाल पूरे मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है, जांच में जो सामने आएगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने किसी पर कोई शक नहीं जताया। इसके बाद पुलिस ने इत्तेफाकिया कार्रवाई कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
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जांच अधिकारी महेश कुमार ने बताया कि उन्हें सोमवार देर रात होटल से सूचना मिली की एक युवक होटल में दो दिन से रुका हुआ है और वह बार-बार आवाज देने के बाद भी कमरा नहीं खोल रहा है और अंदर न ही किसी प्रकार की कोई हरकत हो रही है। सूचना पर वह अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और होटल का दरवाजा तोड़कर देखा तो कुश शर्मा बेड पर अचेत अवस्था में पड़े हुए थे और पास में ही कई तरह की गोलियां पड़ी हुई थी। उन्होंने तुरंत पुलिस की गाड़ी से ही उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। एफएसएल की टीम ने होटल के कमरे में पहुंचकर साक्ष्य जुटाए, जहां से उन्हें अवसाद की गोलियों के काफी रेपर मिले है।
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वहीं सूचना पर मौके पर पहुंची मृतक की पत्नी व कंपनी में साथ काम करने वाले दोस्त राजेश ने बताया कि कुश शिमला से बस के माध्यम से चंडीगढ़ के लिए निकला। यहां से उसने दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ी थी। वह सोमवार को दोबारा कंपनी में अपना काम ज्वाइन कर रहा था। कुश पिछले आठ साल से मानसिक दबाव में चल रहा था। उसे सिजोफ्रेनिया नामक दिमागी बीमारी थी। पत्नी ने बताया कि उन्हें कुश ने रास्ते में अचानक तबीयत बिगड़ने की बात फोन पर बताई थी और बताया कि वह अगले स्टेशन कुरुक्षेत्र पर रुककर किसी होटल में आराम करेगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।
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राजेश ने बताया कि वह कंपनी में कई बार सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का अवार्ड भी अपने नाम कर चुका था। फिलहाल काफी समय से उन्होंने अपनी रिहाइश भी नोएडा के गाैतमबुद्ध नगर सेक्टर 120 अमरपाली जोडिया में की हुई है। वह अपने पीछे पत्नी व आठ साल की बेटी हो छोड़ गए है।
ओवरडोज से हुई मौत, विसरा जांच के लिए भेजा है : डॉ. नरेश
पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक फॉरेसिंक विशेषज्ञ डॉ. नरेश सैनी ने बताया कि प्राथमिकी दृष्टि में युवक की मौत अवसाद की गोलियाें की ओवरडोज लेने से हुई लग रही है। असल कारण जानने के लिए विसरा लेकर लैब में भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही असल कारण पता लग पाएंगे। डॉक्टर ने बताया कि पास से मिली गोलियों व परिजनों के बयान के हिसाब से यह सिजोफ्रेनिया नामक लाइलाज बीमारी से जूझ रहा था। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पीड़ित कल्पना व हकीकत में फर्क करना भूल जाता है और जैसी कल्पना एक बार दिमाग में आ गई वह उसी में कई-कई घंटों तक जीता रहता है, इसका अब तक कोई सटीक उपचार मिल नहीं पाया।
मामले की जांच जारी है : महेश कुमार
जांच अधिकारी महेश कुमार ने बताया कि युवक को अस्पताल ले जाते हुए वह एक बार होश में आया था और पानी मांगा। इस दौरान भी उसने कोई किसी प्रकार की उसके साथ हुई गलत बात का जिक्र नहीं किया था। फिलहाल पूरे मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है, जांच में जो सामने आएगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने किसी पर कोई शक नहीं जताया। इसके बाद पुलिस ने इत्तेफाकिया कार्रवाई कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।